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कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार के तीन साल: क्या शिवकुमार की मुख्यमंत्री बनने की उम्मीदें खत्म हो गईं?

कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार ने अपने तीन साल पूरे कर लिए हैं, जिसमें उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी शामिल हुए। इस अवसर पर उठ रहे सवालों में यह है कि क्या शिवकुमार की मुख्यमंत्री बनने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं। हालिया उपचुनावों में कांग्रेस की जीत ने सिद्धारमैया की स्थिति को मजबूत किया है, जबकि शिवकुमार अकेले पड़ते जा रहे हैं। भाजपा के नेता भी यह मानते हैं कि शिवकुमार का कांग्रेस से मोहभंग हो सकता है। जानें इस राजनीतिक स्थिति का पूरा विश्लेषण।
 

सिद्धारमैया सरकार का तीन साल का जश्न

कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार ने अपने तीन साल पूरे कर लिए हैं। यह अवसर बुधवार, 20 मई को मनाया गया, जिसमें सरकारी समारोह तुमकुरू में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार भी उपस्थित रहे। अब यह सवाल उठता है कि क्या ढाई साल के बाद सत्ता परिवर्तन की मांग और शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की इच्छा अगले चुनाव तक टल गई है? क्या शिवकुमार ने यह मान लिया है कि वे इस विधानसभा में मुख्यमंत्री नहीं बन सकते?


कुछ समय पहले, शिवकुमार ने कहा था कि जब उनकी किस्मत में होगा, तब वे मुख्यमंत्री बनेंगे, और उन्होंने 2028 का भी संकेत दिया था। कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव में कांग्रेस की जीत ने सिद्धारमैया की स्थिति को और मजबूत किया है। इसके अलावा, अहिंदा वोट को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे और सिद्धारमैया की सोच एक समान है। खड़गे के बेटे प्रियांक और सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र ने पहले ही इस मुद्दे पर एक जैसी राय रखी थी। इस स्थिति में, डीके शिवकुमार अकेले पड़ गए हैं। कुछ विधायक उनके साथ हैं, लेकिन उनकी संख्या इतनी नहीं है कि वे कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बना सकें। इसीलिए, डीके शिवकुमार चुपचाप स्थिति का अवलोकन कर रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा के नेता यह उम्मीद जता रहे हैं कि डीकेएस का कांग्रेस से मोहभंग होगा और वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उनके करीबी लोग भी कह रहे हैं कि जैसे भाजपा ने हिमंता, शुभेंदु और सम्राट को सीएम बनाया है, वैसे ही शिवकुमार को भी बना सकती है। हालांकि, यह थोड़ा मुश्किल होगा क्योंकि भाजपा लिंगायत वोट को छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकती।