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कर्नाटक सरकार में महिलाओं की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में महिलाओं की अनुपस्थिति ने सवाल उठाए हैं, खासकर जब केंद्र सरकार महिलाओं के लिए आरक्षण की योजना बना रही है। राहुल गांधी की नीतियों पर आलोचना हो रही है कि वे केवल बात करते हैं, लेकिन जब सरकार बनाने का मौका आता है, तो महिलाओं और अन्य समुदायों को प्राथमिकता नहीं देते। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में मंत्रिमंडल का विस्तार किया, लेकिन इसमें कोई महिला मंत्री शामिल नहीं है। जानें इस मुद्दे की पूरी कहानी।
 

महिलाओं के लिए आरक्षण और कर्नाटक की स्थिति

केंद्र सरकार नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन कर महिलाओं को आगामी लोकसभा चुनावों में एक तिहाई आरक्षण देने की योजना बना रही है। इस बीच, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में महिलाओं की अनुपस्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह आरोप लगाया जा रहा है कि राहुल गांधी केवल महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन जब सरकार बनाने का अवसर आता है, तो वे इन समुदायों को प्राथमिकता नहीं देते।


कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से सरकार केवल 14 मंत्रियों के साथ कार्य कर रही थी, जबकि विधानसभा में 224 सीटों के लिए 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं। शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच तालमेल की कमी के कारण मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा था। हाल ही में, शिवकुमार ने दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात की और 20 नए मंत्रियों को शामिल करने की अनुमति प्राप्त की।


हालांकि, नए मंत्रियों को लेकर असंतोष भी देखने को मिला है। पार्टी के विधायक यशवंतराय गौड़ा पाटिल ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए, जिससे यह संकेत मिलता है कि उनके करीबी विधायकों को मंत्री नहीं बनाया गया। राज्य सरकार में एकमात्र महिला मंत्री के रूप में गायत्री शांति गौड़ा का नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय पर उनका नाम हटा दिया गया। इस प्रकार, राज्य सरकार में कोई महिला मंत्री नहीं है, और विधानसभा तथा विधान परिषद के पीठासीन अधिकारियों में भी कोई महिला नहीं है।