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कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ती दूरी: क्या खत्म हो रहा है गठबंधन?

कांग्रेस पार्टी ने अपनी पुरानी सहयोगी डीएमके से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। चुनाव के बाद, कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन दिया और डीएमके से संबंध समाप्त कर दिए। मणिक्कम टैगोर को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर, कांग्रेस ने डीएमके के साथ संबंध सुधारने की संभावनाओं को समाप्त कर दिया है। क्या कांग्रेस का समय दक्षिण भारत में आ रहा है? जानें इस लेख में।
 

कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में खटास

कांग्रेस पार्टी ने अपनी पुरानी सहयोगी डीएमके से दूरी बनानी शुरू कर दी है। चुनाव खत्म होते ही, कांग्रेस ने डीएमके से अपने संबंध समाप्त कर दिए और टीवीके को सरकार बनाने में समर्थन दिया। टीवीके के नेता विजय ने कांग्रेस को सरकार में शामिल किया, जिससे तमिलनाडु में कांग्रेस का 60 साल का सत्ता का सूखा समाप्त हुआ। इसके बाद, डीएमके ने कांग्रेस से संबंध तोड़ने की घोषणा की और लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अलग बैठने की मांग की। हालांकि, कई लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही दोनों पार्टियां फिर से एक होंगी।


हालांकि, हाल के घटनाक्रम इस संभावना को कमजोर करते हैं। कांग्रेस ने डीएमके और उसके नेता एमके स्टालिन को चिढ़ाते हुए अपने सांसद मणिक्कम टैगोर को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। मणिक्कम टैगोर और स्टालिन के बीच का संबंध बंगाल में ममता बनर्जी और अधीर रंजन चौधरी के रिश्तों जैसा है। विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे से पहले, स्टालिन चाहते थे कि राहुल अपने करीबी मणिक्कम टैगोर को चुप कराएं और बातचीत से दूर रखें। टैगोर पहले से ही विजय के साथ तालमेल बनाने के इच्छुक थे। उन्हें अध्यक्ष बनाकर, कांग्रेस ने निकट भविष्य में डीएमके के साथ संबंध सुधारने की संभावनाओं को समाप्त कर दिया है।


वास्तव में, ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस ने यह समझ लिया है कि दक्षिण भारत में उसका समय आ रहा है। दक्षिण के पांच बड़े राज्यों में से तीन में अब कांग्रेस का मुख्यमंत्री है। चौथा राज्य तमिलनाडु हो सकता है, क्योंकि कांग्रेस को लगता है कि वहां द्रविड़ राजनीति का अंत हो रहा है और डीएमके तथा अन्ना डीएमके दोनों हाशिए पर जा सकते हैं। नई ताकतें उभर रही हैं, जैसे विजय और अन्नामलाई। ऐसे में, कांग्रेस भी अपनी स्थिति को नए सिरे से मजबूत कर सकती है।