कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे की रणनीति पर चर्चा शुरू
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस ने संगठनात्मक तैयारियों को लगभग पूरा कर लिया है। अब पार्टी का ध्यान समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत करने पर केंद्रित है। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, गठबंधन में सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं। इस स्थिति में मुख्य मुद्दा यह होगा कि किन विधानसभा सीटों पर कौन सा दल अपने उम्मीदवार उतारेगा।
2017 के फॉर्मूले की पुनरावृत्ति
सूत्रों के अनुसार, सपा और कांग्रेस के बीच 2017 के विधानसभा चुनाव का फॉर्मूला दोहराया जा सकता है। इस स्थिति में कांग्रेस को लगभग 105 से 115 सीटें मिलने की संभावना है। कुछ सीटें ऐसी भी हो सकती हैं, जहां सपा का जमीनी समीकरण मजबूत हो, लेकिन वहां सपा के उम्मीदवार कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ सकते हैं।
संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए चलाए गए 'संगठन सृजन अभियान' के तहत जिलाध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और नेता विधानमंडल दल की बैठक राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हो चुकी है।
सपा के साथ गठबंधन की तैयारी
इसके बाद प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के साथ भी मुलाकात हुई। इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश नेताओं को स्पष्ट संकेत दिया है कि सपा के साथ बेहतर तालमेल बनाकर चुनाव लड़ने की तैयारी की जाए।
अखिलेश यादव का गठबंधन का संकेत
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं के बीच यह स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी है। इस स्थिति में सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच विवाद की संभावना कम मानी जा रही है।
कांग्रेस का सर्वे और संभावित सीटें
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पार्टी ने अपने स्तर पर सर्वे कर करीब 150 विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है। इन सीटों पर पार्टी को चुनाव लड़ने की बेहतर संभावना नजर आती है और संभावित उम्मीदवारों की स्थिति भी मजबूत बताई जा रही है।
2017 का फॉर्मूला फिर से चर्चा में
कांग्रेस के प्रदेश नेता अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की पैरवी कर रहे हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर 2017 का फॉर्मूला भी चर्चा में है। उस वर्ष कांग्रेस ने कुल 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें 105 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार थे, जबकि नौ सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरे थे।
भाजपा विरोधी वोटों पर ध्यान
कांग्रेस का दावा है कि उसके और सपा के पारंपरिक समर्थकों के अलावा ऐसे मतदाताओं के बीच भी राहुल गांधी का प्रभाव बढ़ा है, जो भाजपा के खिलाफ किसी मजबूत राजनीतिक विकल्प की तलाश में हैं। पार्टी इसी बढ़ती स्वीकार्यता को सीट बंटवारे की बातचीत में अपने पक्ष में महत्वपूर्ण आधार मान रही है।
महागठबंधन से सबक
इसके अलावा बिहार में महागठबंधन के भीतर सामने आई राजनीतिक खींचतान से भी सपा और कांग्रेस ने सबक लेने के संकेत दिए हैं। दोनों दल अब चुनाव से पहले आपसी समन्वय बेहतर करने और गठबंधन में किसी भी तरह की सार्वजनिक खींचतान से बचने पर जोर दे रहे हैं।