कांग्रेस का आरोप: भारत ने चाबहार पोर्ट पर नियंत्रण अमेरिका के दबाव में छोड़ा
कांग्रेस का गंभीर आरोप
नई दिल्ली। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने एक गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि भारत सरकार ने अमेरिका के दबाव में ईरान के चाबहार पोर्ट पर अपना नियंत्रण छोड़ दिया है। कांग्रेस का दावा है कि इससे भारत को 11 सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, 'मोदी सरकार ने चाबहार प्रोजेक्ट में देश की जनता के 120 मिलियन डॉलर यानी करीब 11 सौ करोड़ रुपये लगाए थे। अब ये बरबाद हो चुका है।'
विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कांग्रेस के इस आरोप को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चाबहार पोर्ट से संबंधित योजनाएं अभी भी जारी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत, अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है ताकि इन योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके। अमेरिका ने भारत को ईरान पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार पोर्ट से जुड़े काम जारी रखने के लिए एक विशेष छूट दी है, जो 26 अप्रैल 2026 को समाप्त होगी।
छूट की अवधि
वास्तव में, अमेरिका ने भारत को 27 अक्टूबर 2025 तक चाबहार पोर्ट से व्यापार करने की छूट दी थी। इस छूट को समाप्त होने से पहले ही अमेरिका ने इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया है, जिससे यह छूट अब 26 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि 28 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी वित्त विभाग ने भारत को इस छूट से संबंधित दिशा-निर्देश भेजे थे।
अमेरिका का दृष्टिकोण
जायसवाल ने कहा कि भारत अब इसी व्यवस्था के तहत अमेरिका से बातचीत कर रहा है ताकि चाबहार पोर्ट से जुड़े काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ते रहें। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर प्रतिबंध इसलिए लगाए हैं क्योंकि वह ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाना चाहता है। अमेरिका का मानना है कि ईरान बंदरगाहों, तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं से मिलने वाले पैसों का उपयोग अपने परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और पश्चिम एशिया में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए करता है।