कांग्रेस का पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन: राहुल गांधी और निशिकांत दुबे का विवाद
कांग्रेस का प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर
कांग्रेस का प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर: नीट परीक्षा के पेपर लीक के खिलाफ छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के कई प्रमुख नेता मंगलवार को अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। यह प्रदर्शन कई घंटों तक चला, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने सभी नेताओं को वहां से हटाने का प्रयास किया। राहुल और प्रियंका समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस प्रदर्शन के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी के धरने के कारण उनके छोटे बेटे को परीक्षा केंद्र पहुंचने में आधे घंटे की देरी हुई।
निशिकांत दुबे का बयान
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा कि उनके सरकारी आवास, सफदरजंग लेन के बाहर राहुल गांधी के धरने के कारण उनके छोटे बेटे को परीक्षा केंद्र में पहुंचने में लगभग 30 मिनट की देरी हुई। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या कांग्रेस पार्टी इस देरी की जिम्मेदारी लेगी?" इस बयान के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
कांग्रेस का प्रदर्शन क्यों हुआ?
कांग्रेस ने हाल के छात्र आंदोलनों और परीक्षा से संबंधित विवादों के खिलाफ केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के मुद्दों पर गंभीर चर्चा से बच रही है, जिसके कारण विपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने और उन्हें वहां से हटाने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने अपना विरोध जारी रखा। इसके बाद सुरक्षा बलों ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में सभी को छोड़ दिया गया।
सियासी बयानबाजी में तेजी
धरने के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के धरने पर निशाना साधते हुए कहा, "आज हमने देखा कि राहुल गांधी अपनी पार्टी के कई नेताओं के साथ अचानक प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। लोकतंत्र में प्रदर्शन करना और अपनी आवाज उठाना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी जरूरी है कि प्रदर्शन कहां और किस तरीके से किया जाए। देश कानून और नियमों के अनुसार चलता है, इसलिए उनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी को इन बातों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।"