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कांग्रेस का वंदे मातरम् पर पुराना रुख: केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे

कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् को लेकर अपने पुराने रुख को फिर से स्पष्ट किया है, जिसमें केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। इस निर्णय को 1937 के ऐतिहासिक फैसले से जोड़ा गया है। BJP ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर हमले किए हैं, जबकि केंद्र सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों के लिए नया प्रोटोकॉल जारी किया है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और कांग्रेस का रुख क्या है।
 

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में निर्णय


वंदे मातरम् को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच, कांग्रेस कार्यसमिति ने अपने पुराने रुख को फिर से स्पष्ट किया है। बुधवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पार्टी के कार्यक्रमों में केवल राष्ट्रीय गीत के पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसे 1937 में लिए गए ऐतिहासिक निर्णय से जोड़ते हुए अपने फैसले को स्पष्ट किया है।


वेणुगोपाल ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया

बैठक के चार घंटे बाद, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी में कोई भ्रम नहीं है। उन्होंने बताया कि 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे प्रमुख नेताओं के विचारों के आधार पर जो निर्णय लिया गया था, कांग्रेस उसी का पालन करेगी।


इतिहास में दो अंतरों का महत्व

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, 28 अक्टूबर 1937 को CWC ने वंदे मातरम् पर प्रस्ताव पारित किया था। इसमें सार्वजनिक और राष्ट्रीय आयोजनों के लिए पहले दो अंतरों को उपयुक्त माना गया था। उनका कहना है कि इन हिस्सों में मातृभूमि की व्यापक प्रशंसा है, जबकि आगे के हिस्सों में धार्मिक और पौराणिक संदर्भ आते हैं।


सोनिया गांधी पर BJP का आरोप

विवाद तब और बढ़ गया जब स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन का वीडियो सामने आया। BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने गीत को रोकने का इशारा किया था। इस मामले में दिल्ली और कर्नाटक में उनके खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं। कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश बताया है।


BJP का कांग्रेस पर हमला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और BJP सांसद मनोज तिवारी समेत कई नेताओं ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर असहज है। दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दो अंतरों वाले संस्करण का बचाव करते हुए कहा कि यही परंपरा दशकों से चली आ रही है।


केंद्र का नया प्रोटोकॉल

विवाद के बीच, केंद्र सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों के लिए वंदे मातरम् का नया प्रोटोकॉल जारी किया है। निर्धारित सरकारी समारोहों में छह अंतरों वाले संस्करण का गायन या वादन किया जाएगा, जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी। जब वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाएंगे, तो पहले वंदे मातरम् होगा। हालांकि, कांग्रेस ने अपने पार्टी कार्यक्रमों के लिए दो अंतरों वाला 1937 का निर्णय कायम रखा है।