कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी से इस्तीफे की मांग
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में उठे गंभीर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से त्यागपत्र मांगा गया। खड़गे ने बैठक में कहा कि नैतिकता के आधार पर प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। प्रस्ताव में भी यह बात कही गई कि प्रधानमंत्री को नैतिकता के चलते त्यागपत्र देना चाहिए।
खड़गे ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि निर्वाचन आयुक्तों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में सीईसी को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दबाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है, इसलिए मोदी को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि देश में चुनावों में ईवीएम और मतदाता सूची से जुड़ी 'मैच फिक्सिंग' हो रही है, जिसके खिलाफ पार्टी को संसद से लेकर सड़क तक विरोध करना चाहिए। कार्य समिति के प्रस्ताव में कहा गया कि पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग करती है, जिन्होंने अपने 'सभी नैतिक और संस्थागत अधिकार' खो दिए हैं।
प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि 'प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा खुलेआम 'वोट चोरी' को अंजाम दिया गया है। कांग्रेस ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा आवश्यक है। कार्य समिति ने कहा कि भाजपा और उसके द्वारा नियुक्त अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि जनता के मताधिकार से छेड़छाड़ का जवाब दिए बिना नहीं छोड़ा जाएगा।
पार्टी ने यह भी कहा कि वह संसद, अदालतों और सड़कों पर तब तक विरोध करती रहेगी जब तक दोषियों को दंडित नहीं किया जाता और प्रत्येक नागरिक का वोट सुरक्षित नहीं हो जाता।
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की चर्चा को लेकर चुनाव आयोग के तीनों आयुक्तों ने एक प्रेस कांफ्रेंस में अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। इसके बावजूद, कांग्रेस अगर विरोध के लिए विरोध करने की नीति अपनाती है, तो अंत में कांग्रेस की छवि को नुकसान होगा।
कांग्रेस लोकसभा चुनावों में मिली हार के बाद से खुद को संभाल नहीं पा रही है। अपने अंदर झांकने की बजाय, कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाती जा रही है। कभी ईवीएम, कभी वोट चोरी की बात करती है। कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था, तब भाजपा 400 पार का दावा कर रही थी और 240 सीटों पर सिमट गई थी।
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों की कई राज्यों में सरकारें हैं। अगर वोट चोरी होते तो भाजपा इन प्रदेशों में हारती क्यों? कांग्रेस जमीनी सत्य को समझने में असफल हो रही है, यही कारण है कि वह जनमत को प्रभावित नहीं कर पा रही। कार्य समिति में पारित वर्तमान प्रस्तावों की स्थिति भी पूर्व में पारित प्रस्तावों की तरह ही होगी, क्योंकि जन साधारण उपरोक्त प्रस्तावों को गंभीरता से नहीं ले रहा।
मुख्य संपादक का संदेश
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक