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कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल: क्या है योजना?

कांग्रेस पार्टी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर जब चुनावी राज्यों में उनकी तैयारी की कमी दिखाई दे रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की गतिविधियों के बावजूद, कांग्रेस ने अभी तक चुनावी राज्यों में प्रदर्शन या रैलियों का आयोजन नहीं किया है। क्या कांग्रेस अमेरिका के साथ व्यापार संधि के मुद्दे को चुनावी राज्यों में उठाने में असफल रही है? जानें इस लेख में कांग्रेस की योजना और चुनावी रणनीति के बारे में।
 

कांग्रेस की चुनावी तैयारी पर उठते सवाल

दिल्ली में नहीं, बल्कि चुनावी राज्यों की राजधानियों में यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठ रहा है कि कांग्रेस पार्टी आगामी चुनावों में किस प्रकार से भाग लेगी और चुनाव की घोषणा से पहले उनकी क्या रणनीति है। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संधि के खिलाफ जो प्रदर्शन और रैलियों की योजना बनाई है, उसमें किसी भी चुनावी राज्य का उल्लेख नहीं किया गया है। राहुल गांधी अक्सर इस तरह की रणनीतियों में शामिल होते हैं। 2025 के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लेकिन राहुल गांधी ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाने के लिए एक अलग मुद्दा उठाया। हालांकि, बाद में वे बिहार का दौरा करने गए।


भाजपा की चुनावी गतिविधियाँ

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी गतिविधियों की शुरुआत कर दी है। उनके बड़े नेताओं ने कई रैलियों का आयोजन किया है। जबकि कांग्रेस ने अभी तक केवल कुछ कार्यक्रमों के अलावा कोई ठोस तैयारी नहीं दिखाई है। प्रियंका गांधी वाड्रा के असम दौरे ने कांग्रेस में नई ऊर्जा भरी, लेकिन भाजपा ने उनकी यात्रा को कमजोर करने के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के पार्टी छोड़ने की घोषणा की। इसके बावजूद, प्रियंका की उपस्थिति ने भाजपा के नैरेटिव को कमजोर किया और कांग्रेस समर्थकों में उत्साह बढ़ाया।


कांग्रेस की रैलियों की योजना

राहुल गांधी के दौरे की कमी और व्यापार संधि के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा में चुनावी राज्यों को छोड़ने के बावजूद, कांग्रेस की पहली रैली 24 फरवरी को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित की जाएगी। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस रैली में शामिल होंगे। इसके बाद, कांग्रेस ने बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में रैलियों की योजना बनाई है, जिनमें से किसी भी राज्य में तत्काल चुनाव नहीं हैं।


किसानों के मुद्दे पर ध्यान

कांग्रेस ने इन राज्यों को इसलिए चुना है क्योंकि यहां किसानों की संख्या अधिक है और केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की गई संधि से इन किसानों को नुकसान हो सकता है। जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेब के किसान प्रभावित होंगे, जबकि महाराष्ट्र के कपास के किसानों पर भी इसका असर पड़ेगा। हालांकि, कांग्रेस को उन राज्यों पर भी ध्यान देना चाहिए था, जहां चुनाव होने वाले हैं। चुनाव की घोषणा में केवल दो हफ्ते का समय बचा है, लेकिन कांग्रेस ने अभी तक किसी चुनावी राज्य में प्रदर्शन या रैली का आयोजन नहीं किया है।


कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

क्या कांग्रेस पार्टी भारत और अमेरिका के समझौते में कोई ऐसा पहलू नहीं खोज पाई है जो चुनावी राज्यों से संबंधित हो? दक्षिण के राज्यों पर अमेरिकी टैरिफ का बुरा असर पड़ा है और अमेरिका की वीजा नीतियों के कारण भी दक्षिण के छात्रों और पेशेवरों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मुद्दों पर कांग्रेस तमिलनाडु या केरल में रैली कर सकती थी, लेकिन चुनावी राज्यों को छोड़कर, उन्होंने किसी भी राज्य में प्रदर्शन का निर्णय नहीं लिया है।