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कांग्रेस की चुनौतियाँ: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की भूमिका

कांग्रेस पार्टी की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की भूमिका को उजागर किया गया है। राहुल का लोकसभा में बोलना और मोदी को चुनौती देना महत्वपूर्ण है, लेकिन पार्टी में उनसे मिलना सहज नहीं है। प्रियंका की सक्रियता और संगठन में उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। क्या कांग्रेस अपनी चुनौतियों का सामना कर पाएगी? जानें इस लेख में।
 

कांग्रेस की वर्तमान स्थिति

राहुल गांधी का लोकसभा में बोलना, मोदी को चुनौती देना, विभिन्न समुदायों से संवाद करना, और कांग्रेस के मूल सिद्धांतों जैसे गरीब समर्थक, धर्मनिरपेक्षता, और प्रगतिशीलता पर अडिग रहना सभी महत्वपूर्ण हैं। लेकिन आज भी पार्टी में उनसे मिलना सहज नहीं है। उनकी सोच से हटकर किसी अन्य मुद्दे पर उन्हें तैयार करना काफी कठिन है, जो संगठन के लिए सकारात्मक नहीं माना जाता।


संगठन का वर्ष और दिग्विजय सिंह का सवाल

कांग्रेस ने 2025 को संगठन का वर्ष घोषित किया था, लेकिन यह सवाल उठता है कि पार्टी ने इस समय का कितना सही उपयोग किया। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस पर सवाल उठाया है, लेकिन पार्टी में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। यह सच है कि उनका उदाहरण गलत था, लेकिन सवाल उठाना जरूरी है।


आरएसएस और कांग्रेस का दृष्टिकोण

चौधरी ब्रह्मप्रकाश ने आजादी के बाद आरएसएस के अनुशासन पर टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि आरएसएस के लोग अनुशासित हैं, लेकिन उनके पास चरित्र हनन के लिए कानाफूसी का अभियान चलाने की भी ट्रेनिंग है। यह बात आज भी प्रासंगिक है।


प्रियंका गांधी की भूमिका

प्रियंका गांधी, जो राहुल से छोटी हैं, ने राजनीति में सक्रियता दिखाई है। हालांकि, सक्रिय राजनीति में आने में उन्हें देर हुई। प्रियंका ने एक बार कहा था कि उनके नेता राहुल गांधी हैं, लेकिन संगठन के साल में भी उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं थी।


कांग्रेस की भविष्य की चुनौतियाँ

2026 की शुरुआत के साथ, कांग्रेस के सामने कई चुनौतियाँ हैं। जब एक मजबूत शक्ति कमजोर होती है, तो लोग आपकी लड़ाई की कमजोरियों को देखने लगते हैं। मोदी की कमजोरी अब स्पष्ट हो रही है, और कांग्रेस की लड़ाई से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।