कांग्रेस को चाहिए कि वह देशहित में अपनी राजनीति छोड़ दे
कांग्रेस की राजनीति और संसद का हाल
कांग्रेस को अपनी जिद और तुच्छ राजनीति छोड़कर देश और समाज के व्यापक हित में सोचना चाहिए। यदि लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें बढ़ती हैं और महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व मिलता है, तो इससे लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी। यह बदलाव कांग्रेस के समर्थन से या बिना उसके होना चाहिए।
संसद के सत्रों में आमतौर पर पहले हफ्ते विपक्षी दलों का शोरगुल होता है, लेकिन इस बार मानसून सत्र के तीसरे हफ्ते में भी हंगामा जारी है। विपक्ष ने कई मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता नहीं समझी, जबकि सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए।
हाल ही में, संसद में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने, जन्म और मृत्यु के पंजीकरण, और कराधान से जुड़े विधेयक पास हुए। लेकिन विपक्ष ने इन पर चर्चा नहीं की। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल केवल प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे संसद की कार्यवाही बाधित हो रही है।
कांग्रेस का कहना है कि गृह मंत्री अमित शाह को जंतर मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए, लेकिन जब पेपर लीक बिल पर चर्चा हुई, तब इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई। यह दर्शाता है कि विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है।
कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि संसद विचार-विमर्श का स्थान है, न कि केवल प्रदर्शन का। जंतर मंतर पर पुलिस कार्रवाई और चढ़ावा चोरी के मामले सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं, और विपक्ष को इनकी रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए।
कांग्रेस का गतिरोध बनाए रखने का कारण यह है कि उन्हें डर है कि सरकार नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन का बिल ला सकती है। यदि ऐसा हुआ, तो कांग्रेस के लिए अगले चुनाव में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सरकार ने पहले ही संसद में इन विधेयकों को पास कराने के लिए प्रयास किए हैं। कांग्रेस को चाहिए कि वह चर्चा में शामिल हो और अपने विचार प्रस्तुत करे, बजाय इसके कि वह केवल विरोध करे।
कांग्रेस को अपनी जिद छोड़कर देश और समाज के हित में सोचना चाहिए। यदि लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें बढ़ती हैं और महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व मिलता है, तो इससे लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी।