कांग्रेस ने बारामती सीट से उम्मीदवार का नामांकन वापस लिया
कांग्रेस का नामांकन वापस लेने का निर्णय
कांग्रेस पार्टी ने बारामती निर्वाचन क्षेत्र से अपने उम्मीदवार का नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया है। यह कदम नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन उठाया गया। उल्लेखनीय है कि जिन उम्मीदवारों को कांग्रेस ने टिकट दिया था, वे 2014 में इस सीट पर अपनी जमानत खो चुके थे। इस कारण कांग्रेस का इस मामले में गंभीरता से विचार नहीं था, लेकिन वह चाहती थी कि यदि संभव हो तो नाम वापस लिया जाए।
पहले उपमुख्यमंत्री और बारामती से उम्मीदवार सुनेत्रा पवार ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से संपर्क किया और उम्मीदवार न उतारने की अपील की। हालांकि, सपकाल ने उनकी बात नहीं मानी और अजय मोरे को टिकट दे दिया, जिनका नामांकन भी कर दिया गया। इसके बाद बातचीत का एक नया दौर शुरू हुआ।
शरद पवार की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने कांग्रेस से बातचीत की। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बताया कि महाराष्ट्र में यह परंपरा रही है कि यदि किसी विधायक या सांसद की विधवा उपचुनाव में उम्मीदवार होती है, तो बड़ी पार्टियां अपना उम्मीदवार नहीं उतारती हैं। लेकिन इस पर भी कांग्रेस ने सहमति नहीं दी।
जानकारों का कहना है कि शरद पवार ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में एनसीपी के दोनों धड़ों का विलय संभव है, और उस समय यह सद्भावना काम आएगी। यह ध्यान देने योग्य है कि शरद पवार और उनकी पार्टी के नेता इस प्रयास में लगे हैं कि सुनेत्रा पवार की पार्टी के साथ उनका विलय हो सके। हालांकि, विलय में कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन समस्या यह है कि विलय के बाद एकीकृत पार्टी किस गठबंधन में शामिल होगी। सुनेत्रा एनडीए के साथ रहना चाहती हैं।