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कांग्रेस ने महिला आरक्षण बिल पर मोदी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस पार्टी ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार इस विधेयक को परिसीमन से जोड़कर लागू करने में देरी कर रही है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की मांग की थी। जयराम रमेश ने इन पत्रों को साझा करते हुए सरकार की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने भी मांग की है कि महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए।
 

महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का आरोप

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को महिला आरक्षण विधेयक को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि परिसीमन से जोड़कर महिला आरक्षण को लागू करने में देरी की जा रही है। कांग्रेस ने यह भी बताया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पहले ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग की थी, लेकिन मोदी सरकार इस मुद्दे पर अनसुना कर रही है और इसे परिसीमन से जोड़कर टालने की कोशिश कर रही है।


जयराम रमेश ने साझा किया सोनिया का पत्र

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि 2017 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा से पारित कराने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार को लोकसभा में बहुमत का उपयोग कर इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कराना चाहिए।


सोनिया गांधी का पत्र

सोनिया गांधी ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा इस कानून के समर्थन में रही है और आगे भी रहेगी, क्योंकि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की पहल सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और कांग्रेस ने की थी, जो बाद में 73वें और 74वें संविधान संशोधन के रूप में लागू हुई।


राहुल गांधी की मांग

रमेश ने राहुल गांधी का एक पुराना पत्र भी साझा किया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से संसद के मानसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने के लिए सहयोग मांगा था। राहुल गांधी ने पत्र में लिखा था कि महिला आरक्षण बिल 9 मार्च 2010 को राज्यसभा से पारित हो चुका था, लेकिन उसके बाद लोकसभा में विभिन्न कारणों से अटका रहा।


विपक्षी दलों की मांग

विपक्षी दल ने केंद्र सरकार से मांग की है कि मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों के आधार पर महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए और इसके लिए संसद के मानसून सत्र या मई अंत तक नया विधेयक लाया जाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार का संविधान (131वां संशोधन) विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में गिर गया। इस बिल में महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था।


महिला आरक्षण विधेयक का पारित न होना

मतदान में 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 230 सांसदों ने विरोध में वोट दिया। कुल 528 मतों में से बिल पारित होने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट जरूरी थे, जो सरकार को नहीं मिल सके। प्रस्तावित विधेयक में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की योजना थी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने हेतु सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था।