कांग्रेस ने मोदी सरकार पर अमेरिकी व्यापार समझौते को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस का हमला
नई दिल्ली। कांग्रेस ने रविवार को मोदी सरकार पर अंतरिम अमेरिकी व्यापार समझौते को लेकर निशाना साधा, इसे 'अबकी बार ट्रंप से हार' का प्रतीक बताया। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को रद्द करने के फैसले के बाद, पार्टी ने इसे ठंडे बस्ते में डालने की मांग की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि समझौते की शर्तों पर फिर से बातचीत होनी चाहिए, खासकर कृषि उत्पादों के आयात उदारीकरण से संबंधित खंड को हटाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समझौता लेन-देन पर आधारित है, लेकिन भारत ने केवल दिया है। रमेश ने सवाल उठाया कि 2 फरवरी को ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री को ट्रंप को व्यापार समझौते की घोषणा करने के लिए 'मजबूर' होना पड़ा?
रमेश ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आयात उदारीकरण पर रोक लगाना है। जिन आयातों को कम करने का वादा किया गया था, उनका प्रभाव जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता बहुत खतरनाक है और इसके तहत भारत ने बहुत कुछ दिया है जबकि बहुत कम लिया है।
उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने 2019 में ह्यूस्टन में 'अबकी बार, ट्रंप सरकार' का नारा दिया था। 6 फरवरी को हुई डील साबित करती है कि 'अबकी बार ट्रंप से हार'। रमेश ने आरोप लगाया कि यह समझौता संसद में प्रधानमंत्री पर राहुल गांधी के हमलों से ध्यान भटकाने के लिए किया गया था।
रमेश ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे में यह कहा गया है कि किसी भी पक्ष की ओर से बदलाव की स्थिति में, अमेरिका और भारत अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ में बदलाव किया है, इसलिए भारत को भी अपनी प्रतिबद्धताओं में बदलाव करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त करने या कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। रमेश ने कहा कि इस प्रतिबद्धता का सीधा असर सोयाबीन, मक्का, फल और कपास के किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी थी, तो इतनी जल्दबाजी में समझौता क्यों किया गया?
रमेश ने कहा कि इस मुद्दे पर फैली भ्रम की स्थिति को देखते हुए, इस समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए और शर्तों पर फिर से बातचीत की जाए। उन्होंने कहा कि इससे लाखों किसानों के हितों को नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि ट्रंप के टैरिफ में बदलाव के बाद, भारत के लिए सबसे अच्छा रास्ता यही है कि इस समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध करार दिया है, जो उनके दूसरे कार्यकाल के प्रमुख आर्थिक एजेंडे को बड़ा झटका है।
इस महीने की शुरुआत में, अमेरिका और भारत ने व्यापार पर एक अंतरिम समझौते के लिए एक रूपरेखा तैयार की थी। ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर भारत द्वारा रूसी तेल पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ को हटा दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है।
ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ उनके संबंध शानदार हैं और उन्होंने रूस से तेल की खरीद बंद करने के लिए भारत का आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में 'कोई बदलाव नहीं' हुआ है।