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कांग्रेस नेताओं का केंद्र सरकार पर हमला, छात्रों के अधिकारों की रक्षा की मांग

दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने छात्रों और विपक्षी नेताओं को कुचलने की कोशिश की, तो देशभर में लोग उनके समर्थन में खड़े होंगे। प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह अलोकतांत्रिक है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया।
 

दिल्ली में छात्रों का विरोध और कांग्रेस का समर्थन


दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार को कठोर आलोचना का निशाना बनाया।


दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज को दबाने और विपक्ष को डराने का प्रयास कर रही है।


खरगे ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग बिना पहचान के पुलिस के साथ काम कर रहे हैं, जिससे छात्रों और कांग्रेस नेताओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने छात्रों और कांग्रेस के नेताओं को कुचलने की कोशिश की, तो देशभर में लाखों लोग उनके समर्थन में खड़े होंगे।


कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को बाद में पछताना पड़ेगा कि उसने राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन किसी भी दबाव से नहीं डरेंगे और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।


प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि उनके साथ जो हुआ, वह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि असली सवाल यह है कि छात्रों के साथ जो व्यवहार किया गया, वह सही है या गलत। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहते हैं।


उन्होंने यह भी बताया कि देश में बार-बार परीक्षा पत्र लीक हो रहे हैं और सरकार युवाओं को रोजगार देने में असफल रही है, जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन छात्रों के साथ जो व्यवहार हो रहा है, वह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है।


उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष को महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर नहीं दिया जाता। जब विपक्ष इस संबंध में बात करता है, तो उन्हें सरकार से चर्चा का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि लोकतांत्रिक संवाद की गुंजाइश लगातार कम होती जा रही है।