कांग्रेस नेताओं का पीएम मोदी के खिलाफ महिला आरक्षण पर प्रदर्शन
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का विरोध
नई दिल्ली। रविवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पारित न होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस विरोध में कांग्रेस नेता अलका लांबा भी शामिल थीं। यह प्रदर्शन पीएम मोदी के शनिवार को दिए गए संबोधन के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने 131वें संविधान संशोधन बिल का जिक्र किया, जिसका उद्देश्य महिला आरक्षण लागू करना था। हालांकि, यह बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सका, क्योंकि इंडिया गठबंधन ने परिसीमन के ढांचे का समर्थन करने से इनकार कर दिया था।
कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने पीएम मोदी से सवाल किया कि महिला आरक्षण का लाभ उठाकर और परिसीमन को एक हथियार बनाकर देश की अखंडता पर हमला क्यों किया जा रहा है? उन्होंने यह भी पूछा कि पीएम मोदी ने महिला आरक्षण पर पहले कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए। 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल, परिसीमन और जनगणना के सहारे क्यों लटका हुआ है? इसे 2034 तक के लिए क्यों टाला जा रहा है? उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन हास्यास्पद था और यह कांग्रेस के खिलाफ एक साजिश थी।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी का रवैया महिला-विरोधी है और इस मुद्दे पर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने महिलाओं को बेवकूफ बनाने की कोशिश की है, जिससे उनके महिला-विरोधी इरादे स्पष्ट होते हैं। कांग्रेस पार्टी तब तक चुप नहीं बैठेगी जब तक देश में महिला आरक्षण लागू नहीं हो जाता। विरोध प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस सांसद जेबी मेथर ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी महिला सशक्तिकरण पर एक झूठा नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि 2014 से पीएम मोदी देश का नेतृत्व कर रहे हैं, और इस दौरान भारत की महिलाओं के साथ धोखा हुआ है। यह सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। पीएम मोदी केवल एक ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे महिलाओं के पक्ष में हैं, जबकि असल में वे महिलाओं के खिलाफ हैं।