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कांग्रेस सांसद का केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2026 के खिलाफ विरोध

कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2026 के खिलाफ अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस विधेयक को अनुभवी अधिकारियों को हाशिए पर धकेलने वाला और कमांड संरचनाओं को कमजोर करने वाला बताया। चिदंबरम ने CAPF के जवानों के लिए निष्पक्ष करियर प्रगति और संस्थागत सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया। इस विधेयक पर लोकसभा में चर्चा होने की संभावना है, जिसमें CAPF में नियुक्तियों के लिए प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया है।
 

कांग्रेस सांसद का पत्र प्रधानमंत्री को

नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर प्रस्तावित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल विधेयक 2026 के प्रति अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने देश के अर्धसैनिक बलों की कमांड संरचना के भविष्य को लेकर अपनी चिंताओं को साझा किया। चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर CAPF संशोधन विधेयक के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि यह विधेयक कैडर में लंबे समय से चल रही ठहराव की समस्या को सुलझाने के बजाय प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था को और मजबूत करता है, जिससे अनुभवी अधिकारियों को हाशिए पर धकेलने का खतरा है। इसके अलावा, यह कमांड संरचनाओं को कमजोर करता है।


सांसद ने आगे कहा कि इससे जवानों के मनोबल, परिचालन दक्षता और उन बलों के राजनीतिकरण का खतरा बढ़ता है, जिन्हें मूल रूप से गैर-राजनीतिक रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे CAPF के जवान निष्पक्ष करियर प्रगति, संस्थागत सम्मान और जमीनी अनुभव पर आधारित नेतृत्व के हकदार हैं, न कि उन्हें व्यवस्थित रूप से दरकिनार किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई सुधार नहीं है, बल्कि संस्थागत ढांचे का धीरे-धीरे हो रहा क्षरण है। चिदंबरम ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह CAPF अधिकारियों के साथ एक सार्थक परामर्श करे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो कानून बने, वह सभी पहलुओं को समेटे हुए हो। इस बीच, संसद के उच्च सदन से पारित होने के बाद, लोकसभा में अब CAPF विधेयक 2026 पर चर्चा होने का कार्यक्रम निर्धारित है। इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि CAPF में महानिरीक्षक के पद पर 50 प्रतिशत नियुक्तियां प्रतिनियुक्ति के माध्यम से की जाएंगी। अतिरिक्त महानिदेशक के पद पर न्यूनतम 67 प्रतिशत नियुक्तियां प्रतिनियुक्ति से होंगी और विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के सभी पद केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ही भरे जाएंगे। केंद्रीय मंत्री अमित शाह के राज्य चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में होने की संभावना है, इसलिए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के सदन में इस बिल को पेश करने की संभावना है।