कांग्रेस सांसद ने अमेरिकी राजदूत की गतिविधियों पर उठाए सवाल
अभिषेक मनु सिंघवी की टिप्पणी
कांग्रेस के सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की भारत में बढ़ती गतिविधियों पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि गोर का व्यवहार ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई औपनिवेशिक वायसराय संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर रहा हो, स्थानीय मुद्दों में हस्तक्षेप कर रहा हो और अधिकार के साथ कूटनीतिक कार्य कर रहा हो। यह टिप्पणी तब आई है जब गोर का दौरा दिल्ली से बाहर कश्मीर, लद्दाख, पूर्वोत्तर, पंजाब और अन्य राज्यों के राजनीतिक क्षेत्रों तक फैल गया है।
अमृतसर यात्रा का संदर्भ
सिंघवी की टिप्पणी अमृतसर यात्रा से संबंधित है। 28 सितंबर को, सर्जियो गोर 28 सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ अमृतसर पहुंचे। उन्होंने स्वर्ण मंदिर में पूजा की और जलियांवाला बाग तथा विभाजन संग्रहालय का दौरा किया। स्वर्ण मंदिर में उन्हें सम्मान मिला, लेकिन मंदिर के बाहर का दृश्य अचानक राजनीतिक विवाद में बदल गया। शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने 'खालिस्तान जिंदाबाद' जैसे नारे लगाए।
गोर की अन्य गतिविधियाँ
सिर्फ अमृतसर ही नहीं, अगस्त में गोर ने श्रीनगर का दौरा किया और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को 'भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा' बताया, जो 2019 के बाद किसी वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक की पहली कश्मीर यात्रा थी। इसके बाद गोर ने लद्दाख का दौरा किया, जहां उन्होंने रिवर राफ्टिंग की।
पूर्वोत्तर में गोर का दौरा
गोर का पूर्वोत्तर दौरा भी चर्चा का विषय बना। उन्होंने दार्जिलिंग में राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला के साथ समय बिताया और मणिपुर में राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। यह दौरा मणिपुर में जातीय संघर्ष के समय हुआ।
राजनीतिक नेतृत्व से बातचीत
गोर की गतिविधियों का एक और पहलू राज्यों के राजनीतिक नेतृत्व से उनकी सीधी बातचीत है। उन्होंने केरल, कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की, जहां निवेश और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे उठाए गए।
सार्वजनिक टिप्पणियाँ और विवाद
गोर की एक सार्वजनिक टिप्पणी पर विवाद हुआ, जिसमें उन्होंने भारत और तमिलनाडु को 'हमारे दो राष्ट्र' कहा। इस पर राजनीतिक नेताओं ने सवाल उठाए। बेंगलुरु में भी गोर ने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में भाग लिया।
सवालों का उठना
अभिषेक मनु सिंघवी की 'वायसराय' वाली टिप्पणी को महज राजनीतिक बयान मानना आसान है, लेकिन गोर की बढ़ती सक्रियता यह सवाल उठाती है कि एक विदेशी राजदूत की भूमिका की सीमा क्या होनी चाहिए।