किसान सभा के धरने को श्योराण खाप और जजपा का समर्थन
किसान सभा का धरना और सरकार की अनदेखी
(Charkhi Dadri News) बाढड़ा। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार की बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली के खिलाफ जांच शुरू न करने पर नाराजगी जताई। श्योराण खाप के अध्यक्ष बिजेन्द्र सिंह बेरला और जजपा हलकाध्यक्ष विजय श्योराण ने कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ धरने में भाग लिया।
किसान सभा के अध्यक्ष मा. रघबीर श्योराण की अध्यक्षता में अनाज मंडी परिसर में 17वें दिन धरने को संबोधित करते हुए बिजेन्द्र सिंह बेरला ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें पूंजीपतियों के दबाव में कृषि व्यवस्था को कमजोर कर रही हैं। इससे अन्नदाता, जो कभी राष्ट्र का पेट भरता था, आज महंगाई और कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है।
सीएम का दौरा और जनता की उम्मीदें
किसान सभा के धरने पर बैठे किसानों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं। सरकार को तुरंत इनकी बकाया मुआवजा और अन्य मांगें पूरी करनी चाहिए। जिले में सीएम नायबसिंह सैनी का दौरा भी निराशाजनक रहा, जिससे जनता की योजनाओं के प्रति उम्मीदें टूट गईं। जजपा अध्यक्ष विजय श्योराण काकड़ौली ने कहा कि खरीफ 2023 कपास बीमा क्लेम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने चुनाव आचार संहिता के चलते, भिवानी और चरखी-दादरी जिलों के 450 करोड़ रुपये के क्लेम को घटाकर लगभग 100 करोड़ रुपये कर दिया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि उपग्रह फोटो के नाम पर 350 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।
हरियाणा में फसल बीमा क्लेम में घोटाला
हरियाणा में वर्ष 2022-23 में फसल बीमा क्लेम 2497 करोड़ रुपये था, जबकि चुनावी वर्ष 2023-24 में यह केवल 224 करोड़ रुपये किसानों को दिया गया। यह घोटाला केवल भिवानी और चरखी-दादरी जिलों में ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा में 2250 करोड़ रुपये से अधिक की कमी को दर्शाता है, जो सत्ताधारियों और बीमा कंपनियों की मिलीभगत को उजागर करता है।
इस कारण भिवानी और चरखी-दादरी जिलों के किसान संगठनों ने फसल बीमा क्लेम की लूट के खिलाफ सड़कों पर संघर्ष का निर्णय लिया है। किसान सभा के अध्यक्ष मा. रघबीर श्योराण ने बाढड़ा धरना कमेटी को गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करने और धरना-प्रदर्शन में भागीदारी के लिए प्रचार अभियान शुरू करने का निर्देश दिया।
धरने में भाग लेने वाले किसान
धरने में किसान सभा के संयुक्त सचिव बलबीर ठाकन, रामपाल धारणी, जजपा मीडिया प्रभारी राजेन्द्र सिंह, हरपाल हंसावास, संजय जगरामबास, रणधीर कूंगड़, ब्रह्मपाल बाढड़ा, महीपाल कारीदास, राजेंद्र बेरला, जगदेव भाडवा, ओमप्रकाश लंबरदार, नरेंद्र फोगाट झिंझर, महीपाल कारी दास, युद्धबीर भांडवा, हवासिंह प्राचार्य, महाबीर धनाना, प्रताप सिंहमार, जयपाल काकड़ोली, गुणपाल सिंह, ओमप्रकाश खोरङा, विनोद गोविंदपुरा, नरेश सहित कई किसान शामिल हुए।