कृषि विज्ञान केंद्रों के उन्नयन पर शिवराज सिंह चौहान की समीक्षा बैठक
कृषि विज्ञान केंद्रों का उन्नयन
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के उन्नयन के लिए कार्य योजना की समीक्षा की। इस बैठक में राज्यों की भागीदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से 300 केवीके के बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स के उन्नयन की प्रगति पर चर्चा की गई।
श्री चौहान ने कहा कि केवीके में सुधार के लिए केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय, समय पर वित्तीय सहायता, आधुनिक बुनियादी ढांचे, पर्याप्त मानव संसाधन और जिला-विशिष्ट कार्य योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों को कृषक समुदाय की सेवा करने और कृषि से संबंधित चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक संसाधनों से लैस करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में मुख्य सचिवों के 5वें सम्मेलन से संबंधित केवीके की सिफारिशों के कार्यान्वयन में तेजी लाने के उपायों पर चर्चा की गई। इस दौरान कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. मंगी लाल जाट भी उपस्थित थे।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में मार्च 2027 तक प्राथमिकता वाले 300 केवीके के उन्नयन पर चर्चा की गई। श्री चौहान ने राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी और समय पर समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. मंगी लाल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ वित्तीय और संस्थागत सहायता जुटाने के विषय में बातचीत की। कई राज्यों ने अपने कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से कार्य योजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू की है।
दिसंबर 2028 तक सभी केवीके में इनक्यूबेशन-सह-कौशल केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा की गई। इस पहल के तहत, केवीके का कृषि-आधारित उद्यमों और तकनीकी भागीदार संस्थानों के साथ मानचित्रण किया जा रहा है।
बैठक में केवीके कर्मियों के कार्य की दशाओं पर भी चर्चा की गई। उनके वेतन, भत्ते और पदोन्नति से संबंधित प्रस्तावित सुधारों को मंजूरी मिल चुकी है। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे केवीके में खाली पदों पर समय पर भर्ती सुनिश्चित करें।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि मौसमी कृषि कार्यक्रमों के लिए केवीके को समय पर धन जारी करने के महत्व पर भी चर्चा हुई। वर्ष 2026-27 के लिए दलहन और तिलहन कार्यक्रम पर 353 केवीके के माध्यम से खेती कराई जा रही है।
कृषि मंत्री ने कहा कि मजबूत केवीके वैज्ञानिक ज्ञान, आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों और नवाचारों के अवसरों को किसानों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।