केंद्र सरकार ने एफसीआरए बिल को टाला, विपक्ष की स्थिति कमजोर
एफसीआरए बिल पर सरकार का निर्णय
केंद्र सरकार ने विवादास्पद एफसीआरए बिल को टालने का निर्णय लिया है। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि परिसीमन के मुद्दे पर सरकार विपक्ष का समर्थन प्राप्त करने में असफल हो रही है, और उसकी दो तिहाई संख्या भी पूरी नहीं हो रही है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि विपक्ष इस स्थिति के बाद बातचीत के लिए तैयार हो जाएगा। भाजपा के सूत्रों के अनुसार, एफसीआरए बिल को मोलभाव के एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार के इस कदम से विपक्ष को नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन के मुद्दे पर सहमति देने के लिए मजबूर किया जा सकता है। यदि कांग्रेस सहमत नहीं होती है, तो सरकार उसे अलग थलग करने की योजना बना रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अब दो तिहाई की संख्या पूरी होने वाली है। तृणमूल कांग्रेस के 22 सांसद एनडीए के साथ आ चुके हैं, और उद्धव ठाकरे के छह सांसद भी समर्थन में हैं।
इस प्रकार, संख्या 430 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा था। इसके बाद, डीएमके और सपा का समर्थन भी सरकार को मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि डीएमके और सपा भी पीछे हट रहे हैं। बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें केंद्र सरकार से अपील की गई कि लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 पर स्थिर रखी जाए।
डीएमके ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि एनडीए की पार्टियों ने इसका विरोध किया। लेकिन टीवीके, कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ डीएमके ने समर्थन दिया। इससे यह संकेत मिलता है कि डीएमके ने पहले महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन के मुद्दे पर सरकार का समर्थन करने का मन बनाया था, लेकिन अब उसने अपना मन बदल लिया है।
सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी भी सदन से अनुपस्थित रहकर सरकार की मदद कर सकती है। इसका तर्क यह है कि यदि उत्तर बनाम दक्षिण की बहस होती है, तो सपा के लिए उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का सवाल उठाना मुश्किल होगा। लेकिन चुनाव से छह महीने पहले, सपा भाजपा के साथ दिखने से बचना चाहती है।
सपा ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी को अगले चुनाव का मुद्दा बनाया है और संसद के मानसून सत्र में भी इसी पर प्रदर्शन किया है। यदि सपा और डीएमके ने समर्थन नहीं दिया, तो सरकार की संख्या दो तिहाई तक नहीं पहुंच पाएगी। यह स्पष्ट है कि सरकार इस बार हारने के लिए कोई बिल पेश नहीं करेगी।