केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर दी सफाई
प्रधानमंत्री मोदी का विवादास्पद बयान
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में 'हथियारी नक्सल' के समाप्त होने की बात कही, लेकिन 'दिमागी नक्सल' के अस्तित्व की ओर इशारा किया। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्टीकरण दिया कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को 'दिमागी नक्सल' नहीं कहा।
केंद्रीय मंत्री का स्पष्टीकरण
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि 'दिमागी नक्सल' उन लोगों को संदर्भित करता है जो माओवादियों के समर्थक हैं और भारतीय संविधान का सम्मान नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें अनुच्छेद 370 का समर्थन करने वाले लोग भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्ष के कई नेताओं ने इसे लेकर सवाल उठाए।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।" कांग्रेस पार्टी ने भी मोदी के बयान को खोखला बताया। महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पहले जाति जनगणना की मांग को 'अर्बन नक्सल' कहकर खारिज किया गया था, लेकिन अब इसे स्वीकार कर लिया गया है।
प्रधानमंत्री का संदेश
जयराम रमेश ने मोदी पर आरोप लगाया कि वे विरोधियों की मांगों को अपमानजनक नाम देते हैं और फिर उन्हें स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि 12 साल बाद भी मोदी के भाषण में कुछ नया नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से संबोधन में मोदी ने कहा था कि देश को दिमागी नक्सलियों से बचना चाहिए और ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग करना चाहिए।