केजरीवाल की पंजाब राजनीति में नई रणनीतियाँ और टकराव
पंजाब में केजरीवाल की सक्रियता
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल इस समय पंजाब की राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हैं। वे चुनावी रैलियों और कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं, साथ ही टिकट वितरण और चुनावी रणनीतियों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। राघव चड्ढा और संदीप पाठक के पार्टी छोड़ने के बाद केजरीवाल पर दबाव बढ़ गया है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि केजरीवाल पंजाब में टकराव की राजनीति को अपनाना चाहते हैं और कट्टरपंथी समूहों को संतुष्ट रखने का प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में, उन्होंने एक सजायाफ्ता अपराधी को पार्टी में शामिल किया, जो नाभा जेल ब्रेक मामले में दोषी है। यह कदम उनके लिए राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे अकाली दल और अमृतपाल सिंह की पार्टी को मजबूत नहीं होने देना चाहते।
केंद्र सरकार और न्यायपालिका के साथ टकराव
केजरीवाल ने केंद्र सरकार और न्यायपालिका के साथ भी टकराव का रास्ता अपनाया है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम की सिफारिश पर अश्विनी कुमार शर्मा को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया। आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार ने इस नियुक्ति का विरोध किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनकी राय के बिना यह नियुक्ति की गई। मान ने अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए चीफ जस्टिस के शपथ समारोह का बहिष्कार किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, लेकिन मान नहीं गए। यह माना जा रहा है कि केजरीवाल और मान भाजपा और अकाली दल के बीच तालमेल को लेकर चिंतित हैं, जिसमें भाजपा एक प्रमुख सहयोगी हो सकती है। ऐसे में, केजरीवाल को भाजपा और उसकी केंद्र सरकार के साथ टकराव दिखाना आवश्यक है ताकि जाट सिख और कट्टरपंथी समूहों में भाजपा विरोध का लाभ उठाया जा सके।