केजरीवाल ने शराब नीति घोटाले में हाई कोर्ट के बहिष्कार का किया ऐलान
दिल्ली हाई कोर्ट में केजरीवाल का बहिष्कार
नई दिल्ली। शराब नीति घोटाले से संबंधित मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के अपने पद से अलग न होने के निर्णय के खिलाफ, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अदालत का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। उन्होंने सोमवार को एक वीडियो जारी करते हुए कहा, ‘मैं इस मामले में न तो खुद पेश होऊंगा और न ही कोई मेरी ओर से दलीलें प्रस्तुत करेगा।’ केजरीवाल ने यह भी कहा कि उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है, ‘मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग को अपनाने का निर्णय लिया है। इसका कारण यह है कि जस्टिस स्वर्णकांता के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकील के पैनल में शामिल हैं, जो स्पष्ट रूप से हितों के टकराव को दर्शाता है।’
केजरीवाल ने आगे कहा, ‘सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दोनों बच्चों को केस सौंपे हैं। उनके बेटे को 2023 से 2025 के बीच लगभग 5,904 केस मिले हैं। यदि जज के बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल निर्धारित कर रहे हैं, तो क्या जज साहिबा उनके खिलाफ निर्णय दे पाएंगी?’ उल्लेखनीय है कि दिल्ली शराब नीति घोटाले के मामले में निचली अदालत ने केजरीवाल सहित 24 आरोपियों को बरी कर दिया था।
विशेष अदालत के निर्णय के चार घंटे के भीतर, सीबीआई ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इस मामले की सुनवाई कर रही हैं। केजरीवाल ने उन पर हितों के टकराव का आरोप लगाया है और उनकी कोर्ट में हटाने की याचिका भी दायर की थी। हालांकि, 20 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं इस मामले से खुद को अलग नहीं करूंगी। यदि मैं हट गई तो यह संदेश जाएगा कि किसी भी केस से जज को दबाव डालकर हटाया जा सकता है।’