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केरल का अनोखा मंदिर: जहां पुरुष पहनते हैं साड़ी और करते हैं पूजा

केरल के कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर में एक अनोखी परंपरा है, जहां पुरुष देवी के दर्शन के लिए साड़ी पहनते हैं और 16 श्रृंगार करते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और हर साल चामयाविलक्कु उत्सव के दौरान हजारों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं। जानें इस रहस्यमयी परंपरा की शुरुआत और इसके पीछे की कहानी।
 

एक रहस्यमय मंदिर की कहानी


रहस्यमय मंदिर: क्या आपने कभी सुना है कि एक मंदिर में देवी के दर्शन के लिए पुरुषों को साड़ी पहननी पड़ती है और 16 श्रृंगार भी करना होता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की अद्भुत कहानी।


भारत में एक ऐसा मंदिर है, जो केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां देवी के दर्शन के लिए पुरुषों को साड़ी पहनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल यहां चामयाविलक्कु नामक भव्य उत्सव मनाया जाता है, जिसमें हजारों पुरुष साड़ी पहनकर, गहने पहनकर, मेकअप करके और गजरा लगाकर देवी मां की आराधना करते हैं। इस दौरान मेकअप आर्टिस्ट और ब्यूटी पार्लर की अस्थायी दुकानें भी सज जाती हैं, जहां पुरुष पारंपरिक महिला वेशभूषा में तैयार होते हैं। जब शाम को श्रद्धालु हाथों में दीप लेकर मंदिर पहुंचते हैं, तो पूरा वातावरण भक्ति और रोशनी से जगमगा उठता है।


इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई?


कहा जाता है कि सदियों पहले कुछ चरवाहे लड़के खेल-खेल में लड़कियों का वेश धारण कर पूजा करने आते थे। देवी मां ने उनकी सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया। तभी से यह विश्वास बना कि जो पुरुष सच्चे मन से महिला का रूप धारण कर पूजा करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है।


इस उत्सव में भाग लेने के लिए किसी जाति, धर्म या उम्र की कोई बाध्यता नहीं है। कई श्रद्धालु हर साल अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां आते हैं। यह उत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। भारत की संस्कृति और परंपराएं जितनी विविध हैं, उतनी ही अद्भुत भी हैं।