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केरल चुनाव: पिनरायी विजयन की रणनीति पर सवाल उठे

केरल में सीपीएम के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन की चुनावी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने हिंदू वोटों को लुभाने की कोशिश की, जिससे मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ गई। हाल ही में एझवा नेता नतेशन के साथ उनकी तस्वीर ने विवाद को जन्म दिया है। जानें कैसे यह रणनीति कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
 

मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन की चुनावी चुनौती

केरल में सीपीएम और विशेष रूप से मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के लिए इस बार का चुनाव चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। उन्हें उम्मीद थी कि जैसे उन्होंने 2019 में लोकसभा चुनाव में हार के बाद 2021 में विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी, वैसे ही इस बार भी केरल के लोग कांग्रेस को लोकसभा में जीत दिलाएंगे और विधानसभा में लेफ्ट को मौका देंगे। विजयन लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए चुनावी मैदान में हैं। लेकिन उनकी एक रणनीति गलत साबित हुई। उन्होंने पारंपरिक लेफ्ट राजनीति के बजाय हिंदू वोट को आकर्षित करने की कोशिश की, जिससे मुस्लिम समुदाय में असंतोष बढ़ गया।


हाल ही में विजयन की एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें वे एझवा नेता नतेशन के साथ दिखाई दिए। नतेशन मुस्लिम विरोधी विचारों के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने कई बार मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए हैं। इस कारण मुस्लिम समुदाय में नाराजगी उत्पन्न हुई। इसके अलावा, विजयन ने केंद्र सरकार के प्रति भी सकारात्मक रुख अपनाया, जिसका उद्देश्य केंद्रीय फंड प्राप्त करना बताया गया। इससे भी मुस्लिम मतदाताओं में असंतोष बढ़ा। दूसरी ओर, भाजपा ने एझवा और नायर सेवा संघ के माध्यम से हिंदू वोटों को आकर्षित करने की योजना बनाई है। इस प्रकार, हिंदू वोटों को लुभाने की कोशिश ने विजयन को 45 प्रतिशत अल्पसंख्यक वोट में अस्वीकृति का सामना कराया, जिसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है।