कौन हैं परगट सिंह? पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष की कहानी
पंजाब कांग्रेस का नया नेतृत्व
कांग्रेस पार्टी ने परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू होगा, जैसा कि पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया है। इससे पहले, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने इस पद से इस्तीफा दिया था, और कांग्रेस ने उनके कार्यकाल में किए गए योगदान को भी सराहा है। परगट सिंह, जो भारतीय हॉकी के पूर्व कप्तान और ओलंपियन रह चुके हैं, अब इस नई भूमिका में हैं।
राजनीति में कदम
परगट सिंह ने 2012 में पंजाब विधानसभा चुनावों के दौरान सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उन्होंने जालंधर कैंट सीट से शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। तब से, वह इस क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
अकाली दल से कांग्रेस में शामिल होना
परगट सिंह का अकाली दल से संबंध 2016 में समाप्त हुआ, जब उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया। इसके बाद, वह आवाज-ए-पंजाब फ्रंट से जुड़े, जिसमें पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू जैसे कई नेता शामिल थे। बाद में, उन्होंने कांग्रेस में शामिल होकर 2017 के विधानसभा चुनाव में जालंधर कैंट से जीत दर्ज की।
2022 में जीत का सिलसिला
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भी परगट सिंह ने जालंधर कैंट सीट से जीत हासिल की, जिससे उनकी लगातार जीत का सिलसिला जारी रहा। उन्होंने खेल, प्रशासन, किसानों और अन्य मुद्दों पर सक्रियता बनाए रखी।
चन्नी सरकार में मंत्री
सितंबर 2021 में, परगट सिंह को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में मंत्री बनाया गया। उन्हें स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा मामलों और एनआरआई मामलों जैसे कई विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई। मार्च 2022 तक, वह पंजाब सरकार में मंत्री बने रहे।
2027 चुनाव की तैयारी
परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस की कमान ऐसे समय मिली है जब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। उन्हें पार्टी संगठन की अगुवाई करने और आगामी चुनाव के लिए कांग्रेस की तैयारियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।
चुनावी समितियों में स्थिरता
कांग्रेस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पंजाब में चुनाव से जुड़ी समितियों के कार्यकारी अध्यक्ष, चेयरपर्सन और को-चेयरपर्सन अपने मौजूदा पदों पर बने रहेंगे। इसका मतलब है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का चेहरा बदला है, लेकिन चुनाव से जुड़ी समितियों की जिम्मेदारियां अभी भी बरकरार रहेंगी।