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क्या 2004 की यादें ताजा कर रहा है संसद का हंगामा? राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा की अनोखी मंजूरी

नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण को लोकसभा ने पहली बार 2004 के बाद बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के मंजूरी दी। इस घटना ने संसद में हंगामे को जन्म दिया, जहां विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और कैसे यह घटना 2004 की यादों को ताजा कर रही है। क्या यह लोकतंत्र पर हमला है? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
 

नई दिल्ली में अभिभाषण पर विवाद


नई दिल्ली: पहली बार 2004 के बाद, लोकसभा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब के बिना ही स्वीकृति दे दी। गुरुवार को हुई संयुक्त बैठक में धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित किया गया, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण पीएम का पारंपरिक उत्तर नहीं हो सका।


धन्यवाद प्रस्ताव पर हंगामा

28 जनवरी को राष्ट्रपति के संबोधन के बाद लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया गया। विपक्षी सांसदों ने लगातार नारेबाजी की, जिससे सदन में अव्यवस्था फैल गई। अध्यक्ष ओम बिरला ने विरोध के बावजूद प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित किया। विपक्ष ने पीएम मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ तीखे नारे लगाए। इंडिया ब्लॉक के सदस्यों ने राहुल गांधी को बोलने का अवसर न देने और जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का जिक्र रोकने का आरोप लगाया।


विपक्ष का विरोध

गुरुवार सुबह 11 बजे शुरू हुई बैठक कुछ ही मिनटों में स्थगित हो गई। विपक्षी सांसदों ने राहुल गांधी को बोलने से रोकने पर जोरदार विरोध किया। मंगलवार को आठ कांग्रेस सांसदों को अनुशासनहीनता के आरोप में सत्र के शेष समय के लिए निलंबित कर दिया गया था, जिससे तनाव और बढ़ गया।


विपक्ष के आरोप

विपक्ष का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर राहुल गांधी को बोलने से रोका और जनरल नरवणे की किताब में 2020 के गलवान गतिरोध का जिक्र करने से भी मना किया। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया। हंगामे के कारण पीएम मोदी का जवाबी भाषण रद्द हो गया, जो सदन की परंपरा में महत्वपूर्ण होता है।


2004 की घटना की याद

यह घटना 2004 की याद दिलाती है, जब भाजपा ने यूपीए सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोका था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर मनमोहन सिंह के 10 मार्च 2005 के भाषण का वीडियो साझा किया, जिसमें सिंह ने 10 जून 2004 की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा था कि सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए वे चुप रहे।


सत्र पर प्रभाव

इस हंगामे ने बजट सत्र की शुरुआत को प्रभावित किया है। सदन में महत्वपूर्ण चर्चाएं रुकी हुई हैं और निलंबन के फैसले से तनाव बढ़ा है। दोनों पक्षों के बीच गतिरोध जारी है। अध्यक्ष बिरला ने सदन की कार्यवाही को सुचारू रखने की अपील की है, लेकिन स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।