क्या कांग्रेस ने AI समिट को बदनाम करने के लिए इन्फ्लुएंसर्स को पैसे दिए?
नई दिल्ली में राजनीतिक विवाद का नया मोड़
नई दिल्ली: एआई समिट में हुए शर्टलेस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच टकराव अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने जानबूझकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देकर समिट को बदनाम करने की कोशिश की है।
बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस की पीआर टीम ने कई इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क किया और उन्हें 10,000 से 40,000 रुपये तक की पेशकश की, ताकि वे समिट को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करें और सोशल मीडिया पर इसे फैलाएं।
बीजेपी के आरोपों की गंभीरता
बीजेपी का आरोप
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा, "कांग्रेस का पैसा लो, AI समिट, भारत बदनाम करो मॉडल। क्या कांग्रेस ने AI समिट की बुराई करने के लिए पैसे दिए?"
उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
इन्फ्लुएंसर्स के खुलासे
इन्फ्लुएंसर्स के सामने आए वीडियो
विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने खुलासा किया कि उन्हें कांग्रेस से जुड़े लोगों द्वारा स्क्रिप्टेड कंटेंट बनाने का प्रस्ताव मिला था।
इन वीडियो में इन्फ्लुएंसर्स ने आरोप लगाया कि उन्हें एआई समिट की आलोचना करने के लिए पैसे की पेशकश की गई। कुछ ने यह भी कहा कि उनके पास इस संबंध में चैट मैसेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे सबूत हैं।
शर्टलेस प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
शर्टलेस विरोध से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले शुक्रवार को भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान प्रदर्शनी हॉल में शर्टलेस प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लिखी टी-शर्ट पहनी हुई थीं। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाल दिया।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने आईवाईसी अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. सहित आठ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार
कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार
बीजेपी ने कांग्रेस को "एंटी-इंडिया" बताते हुए आरोप लगाया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।