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क्या तिरंगा लहराना है अपराध? राहुल गांधी ने CJP नेताओं के समर्थन में उठाई आवाज़

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे CJP के नेताओं का समर्थन किया है। उन्होंने तिरंगा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण विरोध का हिस्सा बताया। इस घटना ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को और बढ़ा दिया है। जानें इस मामले में क्या कहा गया है और किस तरह विपक्षी नेताओं ने भी इस गिरफ्तारी की आलोचना की है।
 

राहुल गांधी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का समर्थन


नई दिल्ली: कांग्रेस के नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं का समर्थन किया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि तिरंगा लहराना एक शांतिपूर्ण विरोध का हिस्सा है और इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक चर्चाएँ बढ़ रही हैं।


राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराने के लिए युवाओं को जेल में डालना एक कायरता का कार्य है। उन्होंने कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और नागरिक समाज के संगठन विभिन्न मंचों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। राहुल ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर जनता का है और लोग इसे पुनः प्राप्त करेंगे। उनके इस बयान को CJP के नेताओं के प्रति समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।


जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी

जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड्स को पार करने और तिरंगा लहराने के आरोप में CJP के कई सदस्यों को हिरासत में लिया गया। इनमें आशुतोष रांका और सौरभ दास शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।


पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई जमानत की शर्तों का उल्लंघन थी। वहीं, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि तिरंगा लहराना कैसे अपराध हो सकता है।


विपक्षी नेताओं का समर्थन

CJP के नेताओं को विपक्ष के अन्य नेताओं का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने गिरफ्तारी की आलोचना की है। डीएमके के प्रमुख एमके स्टालिन और आदित्य ठाकरे ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।