क्या दिल्ली पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर सकती है? राहुल गांधी का धरना
राहुल गांधी का धरना
नई दिल्ली: कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर धरना दिया। उनका यह प्रदर्शन 20 जुलाई को CJP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र साहिल लोचब पर पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर था। राहुल ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार कर रही है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस कानूनी रूप से FIR दर्ज करने से मना कर सकती है।
कानूनी दृष्टिकोण: क्या FIR से इनकार संभव है?
भारतीय कानून के अनुसार, इसका उत्तर लगभग 'नहीं' है। BNSS 2023 की धारा 173 के तहत, यदि किसी शिकायत से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, तो FIR दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
यह बात सुप्रीम कोर्ट के 2014 के ललिता कुमारी बनाम यूपी सरकार के फैसले में स्पष्ट की गई थी, जिसमें कहा गया था कि गंभीर अपराध की जानकारी मिलने पर पुलिस को FIR दर्ज करनी होगी।
कांग्रेस का आरोप: शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, साहिल को पैलेट गन से आंख और पेट में चोट आई थी, जिसके बाद उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी करानी पड़ी। उसने 14 अगस्त को वकीलों के माध्यम से लिखित शिकायत दी, लेकिन उसे जांच अधिकारी का नंबर भी नहीं दिया गया।
17 अगस्त को फिर से ईमेल और फोन के जरिए संपर्क किया गया, लेकिन न तो I/O नंबर मिला और न ही कोई पावती दी गई। इस कारण राहुल गांधी पीड़ित के साथ DCP ऑफिस गए।
वकील की राय: FIR न होने पर क्या करें?
एडवोकेट आविष्कार सिंघवी ने बताया कि जब शिकायत से संज्ञेय अपराध बनता है, तो पुलिस के पास FIR से मना करने का विकल्प नहीं होता। BNSS की धारा 173(3) के तहत, पुलिस केवल 3 से 7 साल की सजा वाले मामलों में प्रारंभिक जांच कर सकती है।
यदि पुलिस FIR दर्ज करने से मना करती है, तो शिकायतकर्ता BNSS की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने भी कहा कि संज्ञेय शिकायत को FIR में बदलना अनिवार्य है।
राहुल गांधी का बयान: FIR और न्यायिक जांच का आश्वासन
राहुल गांधी ने X पर लिखा कि साहिल न्याय के लिए FIR दर्ज कराना चाहता है, लेकिन उसे अनुमति नहीं दी जा रही है, जिससे संविधान का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज होगी, न्यायिक जांच होगी और इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
राहुल पहले मंदिर मार्ग थाने गए, लेकिन मांग न मानने पर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में DCP से मिले और बात न बनने पर वहीं धरने पर बैठ गए।
पुलिस और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने कहा कि पीड़ित की शिकायत को क्राइम ब्रांच को भेजा जाएगा, जो 20 जुलाई के सभी मामलों की जांच कर रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादती और हिंसा के आरोपों की जांच के लिए जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो पैलेट गन के इस्तेमाल की भी जांच करेगी।