क्या बांग्लादेश की बिजली कटने का कारण ब्रिक्स सम्मेलन है?
बांग्लादेश की बिजली संकट और ब्रिक्स सम्मेलन का संबंध
क्या बांग्लादेश का ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल न होना उसके लिए नुकसानदायक साबित हुआ? क्या तारिक रहमान की भारत के प्रति की गई चुनौती का परिणाम बांग्लादेश को भुगतना पड़ रहा है? इस समय चर्चा का विषय यही है कि भारत ने बांग्लादेश की बिजली काट दी है। अडानी पावर प्लांट से बांग्लादेश को मिलने वाली बिजली अब ठप हो गई है। बांग्लादेश इस स्थिति को लेकर दुनिया में खुद को पीड़ित के रूप में पेश कर रहा है, यह दिखाते हुए कि भारत ने उनके साथ बदला लिया है। लेकिन वास्तविकता क्या है? दरअसल, 12 और 13 सितंबर को भारत में ब्रिक्स समिट आयोजित हुआ, जिसमें चीन, रूस और अन्य ब्रिक्स देशों के नेता शामिल हुए। बांग्लादेश को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन बीएनपी के नेता तारिक रहमान ने भारत में एक अधिकारी की बेइज्जती के कारण जाने से मना कर दिया। सम्मेलन के बाद, बांग्लादेश ने यह माहौल बनाना शुरू कर दिया कि ब्रिक्स में न जाने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
बीएनपी ने तारिक रहमान के ब्रिक्स सम्मेलन में न जाने को अडानी पावर के थर्मल प्लांट में शटडाउन से जोड़ दिया। यह प्लांट बांग्लादेश को बिजली प्रदान करता है, जो तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गया। इसके परिणामस्वरूप, पिछले हफ्ते बांग्लादेश में तीन दिन तक बिजली संकट रहा। बीएनपी ने इस स्थिति को रहमान के ब्रिक्स में न जाने से जोड़कर भारत को बदनाम करने की योजना बनाई। बीएनपी के कार्यवाहक महासचिव कबीर रिवी ने कहा कि तारिक रहमान एक संप्रभु देश के प्रधानमंत्री हैं, इसलिए उन्हें दिल्ली में आमंत्रित नहीं करना उचित नहीं था।
तारिक रहमान के ब्रिक्स में न जाने के अगले दिन ही प्लांट बंद कर दिया गया। इसके पीछे की असली वजह क्या है? बांग्लादेश ने बिजली कटने की घटना को ब्रिक्स सम्मेलन से जोड़कर विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया। जबकि सच्चाई यह है कि झारखंड के प्लांट में 10 सितंबर को तकनीकी खराबी आई थी, जिसके कारण बिजली सप्लाई में रुकावट आई। बांग्लादेश ने 84 घंटों तक बिजली संकट का सामना किया, और 13 सितंबर को फिर से बिजली सप्लाई शुरू की गई।