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क्या बिहार और बंगाल का होगा विभाजन? अमित शाह ने अफवाहों को किया खारिज

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया दौरे के बाद बिहार और पश्चिम बंगाल के विभाजन की अफवाहें तेज हो गई थीं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विभाजन की कोशिश कर रही है। हालांकि, सरकार ने इन अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पीआईबी ने भी इस दावे को गलत बताया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और क्यों यह चर्चा महत्वपूर्ण है।
 

अमित शाह की बैठकें और अफवाहों का बाजार


नई दिल्ली: हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल क्षेत्र का दौरा किया, जिसके बाद उनकी बैठकों को लेकर कई चर्चाएं शुरू हो गईं। इस दौरे के बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य को विभाजित करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन अटकलों को पूरी तरह से निराधार बताया है।


पीआईबी फैक्ट चेक ने इन दावों को गलत ठहराया है। सरकारी सूचना इकाई के अनुसार, बिहार और पश्चिम बंगाल के जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।


सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि बिहार के सीमांचल क्षेत्र के चार जिले—पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया—को पश्चिम बंगाल के कुछ उत्तरी जिलों जैसे मालदा, उत्तर दिनाजपुर और सिलीगुड़ी के साथ जोड़कर नया प्रशासनिक क्षेत्र बनाया जा सकता है।


हालांकि, पीआईबी ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की कोई योजना केंद्र सरकार के पास नहीं है और यह पूरी तरह से एक अफवाह है।


गृह मंत्रालय ने भी किसी योजना की पुष्टि नहीं की है। पीआईबी के अनुसार, गृह मंत्रालय या किसी अन्य सरकारी एजेंसी ने ऐसे किसी प्रस्ताव की पुष्टि नहीं की है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह की अपुष्ट और संवेदनशील खबरों को साझा करने से बचें।


सरकार का कहना है कि इस तरह की अफवाहें क्षेत्रीय भावनाओं को भड़का सकती हैं और राजनीतिक तनाव पैदा कर सकती हैं।


यह चर्चा उस समय तेज हुई जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीमांचल और उत्तर बंगाल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बैठकें की थीं।


इन बैठकों में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकने और ड्रग तस्करी पर नियंत्रण जैसे विषयों पर चर्चा की गई थी।


भारतीय सेना ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किशनगंज (बिहार) और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में नई चौकियां स्थापित की हैं।


कुछ विपक्षी दलों और स्थानीय मीडिया के एक हिस्से ने इन सुरक्षा उपायों को नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी के तौर पर पेश किया, जिसे अब केंद्र सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।


सिलीगुड़ी कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण भूभाग है, जिसकी चौड़ाई लगभग 20 से 22 किलोमीटर है। यह मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एक रणनीतिक क्षेत्र है।


सरकार यहां करीब 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेलवे परियोजना पर काम करने की योजना बना रही है, ताकि युद्ध या आपदा की स्थिति में पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क बाधित न हो। हालांकि, इसके लिए किसी प्रकार के प्रशासनिक या भौगोलिक बदलाव की कोई योजना नहीं है।