×

क्या बुर्के वाली मुस्लिम महिला ही बनेगी प्रधानमंत्री?

एमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी और वारिस पठान ने हाल ही में बुर्के वाली मुस्लिम महिलाओं के राजनीतिक महत्व पर जोर दिया है। ओवैसी का कहना है कि एक दिन ऐसी महिला प्रधानमंत्री बनेगी। लेकिन क्या यह सही है कि केवल बुर्के वाली महिलाएं ही उच्च पदों के लिए योग्य हैं? इस लेख में हम इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और यह जानेंगे कि क्या सभी मुस्लिम महिलाओं को समान अवसर मिलना चाहिए।
 

ओवैसी और पठान का बयान

एमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और उनके प्रवक्ता वारिस पठान जब भी मुस्लिम महिलाओं का जिक्र करते हैं, तो वे अक्सर 'बुर्के वाली मुस्लिम महिला' का उल्लेख करते हैं। हाल ही में ओवैसी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि एक दिन बुर्के वाली मुस्लिम बहन इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी। उनका कहना है कि चाहे हम रहें या न रहें, यह अवश्य होगा। इससे पहले, दोनों नेताओं ने मुंबई नगर निगम के चुनाव में भी कहा था कि इस बार कोई बुर्के वाली मुस्लिम महिला मेयर बनेगी। उन्होंने बार-बार यह भी कहा कि चूंकि एक मुस्लिम राष्ट्रपति बन चुका है, इसलिए प्रधानमंत्री और मेयर भी बन सकता है।


सवाल उठता है

लेकिन सवाल यह है कि ये नेता सीधे मुस्लिम महिलाओं का उल्लेख क्यों नहीं करते? वे क्यों चाहते हैं कि केवल बुर्के वाली महिलाएं ही मेयर या प्रधानमंत्री बनें? भारत में करोड़ों मुस्लिम महिलाएं हैं जो बुर्का नहीं पहनतीं, और विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। उन्हें भी मेयर और प्रधानमंत्री बनने का हक क्यों नहीं है? इस पर संदेह होता है कि ओवैसी और उनकी पार्टी वास्तव में किसी मुस्लिम महिला को उच्च पद पर देखना चाहती हैं या नहीं। ऐसा लगता है कि उनका उद्देश्य सभी मुस्लिम महिलाओं को बुर्का पहनाने का है। यदि ऐसा नहीं होता, तो वे स्पष्ट रूप से कहते कि एक दिन कोई मुस्लिम महिला मुंबई की मेयर या इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी।