क्या भारत में विदेशी ताकतें कर रही हैं विरोध प्रदर्शनों को फंड? हरीश साल्वे का बड़ा बयान
हरीश साल्वे का विवादास्पद बयान
नई दिल्ली: हाल ही में देश में हुए विरोध प्रदर्शनों पर पूर्व सॉलिसिटर जनरल और प्रमुख वकील हरीश साल्वे ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत में चल रहे आंदोलनों को विदेशी फंडिंग मिल रही है और इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का हाथ है। साल्वे ने कहा कि भारत में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे हालात उत्पन्न करने की कोशिश की जा रही है। लंदन में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया, "मैं यह आरोप लगा रहा हूं कि ये आंदोलन बाहरी फंडिंग से चलाए जा रहे हैं और इन्हें बाहर से प्रेरित किया जा रहा है।"
अमेरिका की भूमिका पर सवाल
साल्वे ने अमेरिका का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका भारत की प्रगति से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि हमारे वित्त मंत्री ने खुद कहा है कि अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत चल रही है, विशेषकर कनाडा के साथ, लेकिन अमेरिका के साथ वार्ता एक निश्चित स्तर पर रुक गई है।
नेपाल और बांग्लादेश का संदर्भ
साल्वे ने यह भी कहा कि क्या किसी को संदेह है कि नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में अस्थिरता किसने पैदा की? उन्होंने सवाल उठाया कि शेख हसीना को हटाने के पीछे कौन था। उनका मानना है कि ये सब बाहरी शक्तियों द्वारा किया जा रहा है और अब भारत में भी ऐसा ही माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कुछ एक्टिविस्ट और यूट्यूबर्स का नाम लेते हुए यह भी पूछा कि ये लोग अचानक कैसे सामने आए।
मोदी सरकार को हटाने की साजिश का आरोप
साल्वे ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि मोदी सरकार को हटाने की कोशिशें चल रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने झुकने से इनकार कर दिया है, इसलिए ऐसे लोगों को लाने की कोशिश की जा रही है जो विदेशी ताकतों के अनुकूल हों। पिछले 6-8 महीनों में एक स्पष्ट पैटर्न उभरकर सामने आया है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस स्थिति का सख्ती से सामना करे।