क्या ममता बनर्जी खुद बहरामपुर से चुनाव लड़कर टीएमसी को बचाएंगी?
कोलकाता में ममता बनर्जी की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी हार और पार्टी में विद्रोह की संभावनाओं के बीच ममता बनर्जी की स्थिति कठिन होती जा रही है। इस बीच, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि टीएमसी की प्रमुख खुद लोकसभा चुनाव में भाग लेकर पार्टी को संभालने का इरादा रखती हैं। इसके लिए उन्होंने बहरामपुर सीट को चुना है, जहां से पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान सांसद हैं।
बहरामपुर सीट पर ममता का ध्यान क्यों?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ममता बनर्जी ने बहरामपुर से चुनाव लड़ने के लिए यूसुफ पठान से इस्तीफा देने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। बहरामपुर में लगभग 70 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में, यूसुफ पठान ने कांग्रेस के प्रमुख नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर एक महत्वपूर्ण जीत हासिल की थी।
यह चर्चा उस समय उठी है जब टीएमसी के 23 सांसदों के टूटने की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। माना जा रहा है कि ममता खुद लोकसभा में पहुंचकर पार्टी को संभावित टूट से बचाना चाहती हैं। एक ओर बहरामपुर से उनके चुनाव लड़ने की बात चल रही है, वहीं दूसरी ओर मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट से हुमायूं कबीर ने ममता को चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है।
यूसुफ पठान ने सीट छोड़ने से किया इनकार
रिपोर्टों के अनुसार, भले ही ममता बहरामपुर से चुनाव लड़ने की योजना बना रही हों, लेकिन गुजरात के वडोदरा से संबंधित यूसुफ पठान ने सीट खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने इस्तीफे की संभावना को नकार दिया है। 2024 के चुनाव में, यूसुफ को ममता बनर्जी का समर्थन मिला था, जिससे उन्होंने अधीर रंजन चौधरी को 85,000 वोटों से हराया था। उन्हें कुल 5,24,516 वोट मिले थे।
बहरामपुर की मुस्लिम बहुल आबादी और टीएमसी के मजबूत संगठन ने यूसुफ की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब जब पार्टी में खींचतान बढ़ रही है, तो ममता के लिए यह सीट राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हो गई है।
पार्टी में विद्रोह की आशंका
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से टीएमसी में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कुछ विधायकों ने विद्रोही गुट बना लिया है। अब यह चर्चा है कि यह असंतोष सांसदों तक भी पहुंच सकता है। मानसून सत्र से पहले पार्टी में बड़ा बदलाव होने की संभावनाएँ जताई जा रही हैं।
कोलकाता से दिल्ली तक इस बात की चर्चा है कि यदि सांसदों ने विद्रोह किया, तो टीएमसी के लिए लोकसभा में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में ममता का खुद चुनाव लड़ना पार्टी को एकजुट रखने की एक रणनीति मानी जा रही है।
फिलहाल, टीएमसी के पास लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। यूसुफ पठान के इनकार के बाद अब ममता का अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।