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क्या मेटा के एल्गोरिदम में है सरकार विरोधी कंटेंट को बढ़ावा देने का खेल?

केंद्र सरकार ने मेटा के अधिकारियों को तलब कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम की जांच शुरू की है। सरकार का आरोप है कि कुछ सरकार विरोधी पोस्ट को अधिक प्रमुखता दी जा रही है। इस संदर्भ में, मेटा से विस्तृत जानकारी और स्पष्टीकरण मांगा गया है। जानें, इस मामले में मेटा का क्या जवाब होगा और सरकार की चिंताएं क्या हैं।
 

केंद्र सरकार का सख्त रुख


नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उनके एल्गोरिदम के संचालन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जानकारी के अनुसार, सरकार ने मेटा (Meta) के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख जोएल कपलान को 5 अगस्त को तलब किया है। इसके साथ ही, इंस्टाग्राम के तकनीकी विशेषज्ञों को भी बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया है। सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम और कंटेंट प्रमोशन की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना है।


सरकार विरोधी पोस्ट की बढ़ती प्रमुखता

सूत्रों के अनुसार, सरकार को कई शिकायतें मिली हैं जिनमें यह आरोप लगाया गया है कि कुछ सरकार विरोधी पोस्ट को सोशल मीडिया पर अधिक प्रमुखता दी जा रही है। इस संदर्भ में, केंद्र यह जानना चाहता है कि मेटा और उसके प्लेटफॉर्म किस आधार पर किसी कंटेंट की पहुंच बढ़ाते हैं और किस मानक के तहत पोस्ट की दृश्यता निर्धारित की जाती है।


इसके अलावा, सरकार तकनीकी गड़बड़ियों से संबंधित मामलों पर भी मेटा से लिखित स्पष्टीकरण मांग सकती है। प्रधानमंत्री से जुड़े एक पोस्ट को हटाने के मामले में मेटा से औपचारिक माफी की मांग की संभावना भी जताई जा रही है।


सोशल मीडिया एल्गोरिदम पर उठे सवाल

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की पहुंच और व्यूअरशिप के आंकड़ों में कई ऐसे पहलू हैं जिन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, कुछ समूहों और अभियानों को असामान्य रूप से अधिक व्यूअरशिप मिल रही है, जिनका कोई राजनीतिक या संस्थागत आधार नहीं है।


मेटा के जवाब का इंतजार

हाल ही में संसदीय समिति की बैठक में मेटा के अधिकारियों ने तकनीकी चूक के लिए खेद व्यक्त किया था। हालांकि, समिति के सदस्यों ने उनसे यह भी पूछा कि ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और भविष्य में इसे रोकने के लिए कंपनी क्या कदम उठाएगी। बैठक में यह मांग भी उठी थी कि मेटा का वैश्विक नेतृत्व इस मामले पर औपचारिक रूप से माफी व्यक्त करे। अब केंद्र सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी से लिखित जवाब और स्पष्टीकरण मांगने की तैयारी की है। अब देखना होगा कि मेटा सरकार द्वारा उठाए गए सवालों का क्या उत्तर देता है।