क्या विज्ञान के जरिए लौट सकता है मृतक? मुंबई में अनोखा मामला सामने आया
मुंबई में एक अनोखी घटना
नई दिल्ली: सोचिए, एक व्यक्ति जो चार साल पहले इस दुनिया को छोड़ चुका है, उसका परिवार अब भी यह उम्मीद कर रहा है कि विज्ञान उसे फिर से जीवित कर देगा। यह मामला मुंबई के मलाड से सामने आया है, जहां पुलिस ने एक स्थानीय क्लिनिक से 80 वर्षीय व्यक्ति का शव बरामद किया, जिसे चार साल पहले मृत घोषित किया गया था।
परिवार की अनोखी इच्छा
पुलिस को इस मामले की जानकारी एक मुखबिर के माध्यम से मिली, जिसके बाद उनकी टीम मलाड के क्लिनिक पहुंची। जांच में यह सामने आया कि मृतक के परिवार ने उसकी मृत्यु के बाद शव को संरक्षित रखने का निर्णय लिया था। परिवार का कहना है कि वे बहुत परेशान थे और शव को अमेरिका के एक क्रायोनिक्स सेंटर भेजना चाहते थे, जहां लंबे समय तक शरीर को सुरक्षित रखा जा सकता है।
क्रायोनिक्स की प्रक्रिया
क्रायोनिक्स क्या है?
क्रायोनिक्स एक ऐसी तकनीक है, जिसमें मृत्यु के बाद मानव शरीर को अत्यधिक कम तापमान पर संरक्षित किया जाता है, इस आशा के साथ कि भविष्य में चिकित्सा विज्ञान इतनी उन्नति कर लेगा कि मृतक को पुनर्जीवित किया जा सके। हालांकि, कोशिकाओं और ऊतकों को इस तरह से संरक्षित करना एक स्थापित प्रक्रिया है, लेकिन पूरे मानव शरीर के लिए यह अभी भी प्रयोगात्मक है।
भारत में क्रायोनिक्स का कानूनी पहलू
कानून क्या कहता है?
दिलचस्प बात यह है कि भारत में क्रायोनिक्स के लिए कोई स्पष्ट कानून नहीं है। न तो इसे प्रतिबंधित किया गया है और न ही इसकी अनुमति दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले यह स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मृतकों के लिए गरिमा का अधिकार भी लागू होता है, जिसके तहत शव का सम्मानजनक अंतिम संस्कार आवश्यक है। कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिकार क्रायोप्रिजर्वेशन जैसे विकल्पों तक भी फैला सकता है, लेकिन इसे औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।
संभावित कानूनी समस्याएं
बिना सूचना के शव रखना बन सकता है मुसीबत
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि किसी की मृत्यु को छुपाने या पेंशन जैसे वित्तीय लाभ के लिए धोखाधड़ी करने के इरादे से शव को गुप्त रूप से संरक्षित किया जाए, तो यह गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है। फिलहाल, पुलिस इस मामले में कानूनी सलाह ले रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शव को कब तक रखा जा सकता है। मृतक के अंतिम संस्कार के संबंध में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।