क्या विपक्षी गठबंधन एसआईआर के खिलाफ एकजुट होगा?
विपक्षी गठबंधन की एकजुटता की आवश्यकता
क्या विपक्षी गठबंधन, जिसे 'इंडिया' ब्लॉक कहा जाता है, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर एकजुट होकर संघर्ष करेगा? इस संबंध में सीपीआई माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने एक अपील की है। उल्लेखनीय है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों दीपांकर भट्टाचार्य के साथ अधिक समय बिता रहे हैं। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी के निधन के बाद से दीपांकर भट्टाचार्य राहुल के करीबी सलाहकार बन गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि 'इंडिया' ब्लॉक की एक बैठक आयोजित की जाए और एसआईआर के खिलाफ देशभर में एक संयुक्त आंदोलन किया जाए।
हालांकि, सीपीआई माले का मुख्य आधार बिहार में है, लेकिन इसकी छात्र इकाई आईसा ने पूरे देश में पहचान बनाई है। नेहा बोरा, जो जंतर मंतर पर भूख हड़ताल के बाद से चर्चा में हैं, राज्यों में जाकर छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठा रही हैं। दीपांकर भट्टाचार्य का मानना है कि कांग्रेस को नेतृत्व करना चाहिए और एसआईआर के खिलाफ एक संगठित आंदोलन चलाना चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इसके लिए तैयार है? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जून में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद हुई बैठक में ममता बनर्जी भी शामिल हुई थीं और उन्होंने एसआईआर का मुद्दा उठाया था। उनकी पार्टी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई गंभीर सवाल पूछे हैं। 'एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड और डुप्लीकेट' यानी 'एएसडीडी' श्रेणी में जिनके नाम कटे हैं, उनमें भी गड़बड़ी पाई गई है। तार्किक विसंगति के आधार पर 27 लाख से अधिक नाम कटे हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत सही पाए गए हैं। अब तक 83 हजार से अधिक मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच की गई है और 90 प्रतिशत से अधिक सही पाए गए हैं।
ममता ने ये सभी बातें जून 2026 की बैठक में कांग्रेस सहित अन्य नेताओं को बताई थीं। लेकिन उसके बाद राहुल गांधी चुप्पी साधे रहे। दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों के आंकड़े भी सामने आए हैं, जहां दिल्ली में 35 प्रतिशत और महाराष्ट्र में दो करोड़ से अधिक लोगों के नाम कट गए हैं। लेकिन कांग्रेस एसआईआर के मुद्दे पर गंभीरता से लड़ने के लिए तैयार नहीं है।
कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि बिहार में एसआईआर के मुद्दे पर राहुल ने 16 दिन तक यात्रा की थी, लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। इसके बाद से राहुल इस मुद्दे के प्रति उदासीन हो गए हैं। वे जाति विभाजन और महिला व युवा अस्मिता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ऐसे में यह संदेह है कि दीपांकर भट्टाचार्य की अपील पर कांग्रेस एसआईआर का मुद्दा उठाकर देशभर में प्रदर्शन करेगी। हालांकि, विपक्ष के कई नेता मानते हैं कि यदि एसआईआर का मुद्दा उठाया जाए तो लोग जुड़ेंगे। लेकिन राहुल को इस पर कोई चिंता नहीं है।