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क्या हिजाब पहनने वाली महिला बन सकती है भारत की प्रधानमंत्री? ओवैसी के बयान पर गरमाई सियासत

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी। इस पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि एआईएमआईएम इसे संविधान का अधिकार मानती है। ओवैसी का यह बयान चुनावी माहौल में आया है, जहां उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए समान अधिकारों की बात की। जानें इस सियासी जंग के सभी पहलू।
 

सियासी बयान से शुरू हुई बहस


मुंबई: हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। ओवैसी ने कहा कि "एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी।" इस पर भाजपा और एआईएमआईएम के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। भाजपा के नेताओं ने इस बयान को भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक परंपराओं के खिलाफ बताया, जबकि एआईएमआईएम इसे संविधान के तहत अधिकार मानती है।


चुनावों के बीच ओवैसी का बयान

दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी स्थानीय निकाय चुनावों के प्रचार में जुटे हैं। सोलापुर में एक जनसभा के दौरान उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि यह किसी भी नागरिक को, धर्म या पहनावे की परवाह किए बिना, प्रधानमंत्री बनने की अनुमति देता है। उन्होंने पाकिस्तान के संविधान की तुलना करते हुए कहा कि वहां केवल एक विशेष धर्म के व्यक्ति को ही प्रधानमंत्री बनने की अनुमति है, जबकि भारत में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है।


हिजाब पहनने वाली बेटी का सपना

ओवैसी ने अपने भाषण में कहा, "बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान के तहत कोई भी भारतीय नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या महापौर बन सकता है। मेरा सपना है कि एक दिन इस देश की प्रधानमंत्री हिजाब पहनने वाली बेटी बने।" उनके समर्थकों ने इसे समावेशी सोच का प्रतीक बताया, जबकि विरोधियों ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया।


भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया

भाजपा नेताओं ने ओवैसी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने कहा कि भारत में इस तरह की सोच संभव नहीं है और जो लोग ऐसा सपना देखते हैं, उन्हें पाकिस्तान के शहरों इस्लामाबाद या कराची जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की बहुसंख्यक आबादी हिंदू है और यहां ऐसी राजनीति नहीं चलेगी।


एआईएमआईएम का संविधान का बचाव

नितेश राणे के बयान पर एआईएमआईएम के प्रवक्ता वारिस पठान ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी के बयान में कुछ भी असंवैधानिक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है और किसी के पहनावे के आधार पर उसके राजनीतिक अधिकार नहीं छीने जा सकते। पठान ने सवाल उठाया कि अगर संविधान इसकी अनुमति देता है, तो इसमें आपत्ति किस बात की है।


भाजपा की नई चुनौती

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ओवैसी को चुनौती दी कि यदि वे इस विचारधारा में विश्वास रखते हैं, तो पहले अपनी पार्टी की अध्यक्ष किसी हिजाब या बुर्का पहनने वाली महिला को बनाकर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बनने के लिए पहले लोकतांत्रिक तरीके से जनता का विश्वास जीतना जरूरी है।


हिजाब पर पुराना विवाद फिर उभरा

गौरतलब है कि हिजाब का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से देश में विवाद का विषय रहा है। कई राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने को लेकर बहस और विरोध देखने को मिला है। ओवैसी के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां एक ओर संविधान और समान अधिकारों की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान से जोड़ा जा रहा है।