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क्या है पीएम मोदी का लाल किले से बिना बुलेटप्रूफ शीशे के भाषण देने का राज?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देने के दौरान बुलेटप्रूफ शीशा हटाने का निर्णय लिया। इस निर्णय के पीछे उनकी सोच थी कि वह जनता से बेहतर तरीके से जुड़ सकें। सुरक्षा अधिकारियों की चिंताओं के बावजूद, मोदी ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए इस व्यवस्था में बदलाव किया। जानें इस निर्णय के पीछे की पूरी कहानी और कैसे यह स्वतंत्रता दिवस समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
 

प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन

नई दिल्ली: लाल किले से प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देश की महत्वपूर्ण राजनीतिक परंपराओं में से एक है। 2014 में इस मंच से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया। पहले, प्रधानमंत्री बुलेटप्रूफ शीशे के पीछे खड़े होकर भाषण देते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे हटाने की आवश्यकता महसूस की। पूर्व रक्षा सचिव आरके माथुर के अनुसार, इसके पीछे प्रधानमंत्री की एक विशेष सोच थी।

2014 से पहले, स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री के सामने बुलेटप्रूफ ग्लास लगाया जाता था, जिसका उद्देश्य उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना था। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव किया गया और सुरक्षा शीशा हटा दिया गया। तब से, प्रधानमंत्री मोदी बिना बुलेटप्रूफ ग्लास के लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित कर रहे हैं। हालांकि, इस निर्णय को लागू करना सुरक्षा अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण था।


मोदी का स्पष्ट संदेश

मोदी ने कहा- शीशा रहा तो ठीक से नहीं कर पाऊंगा संबोधन

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आरके माथुर ने इस बदलाव की पूरी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक ने प्रधानमंत्री को सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। इसी दौरान बुलेटप्रूफ बैरियर का भी जिक्र हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उनके सामने शीशा लगा रहेगा, तो वह देशवासियों से सही तरीके से संवाद नहीं कर पाएंगे। उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों को बताया कि यदि बुलेटप्रूफ बैरियर नहीं हटाया गया, तो वह भाषण नहीं देंगे।


सुरक्षा अधिकारियों की चिंताएं

अधिकारियों को थी सुरक्षा की चिंता

सुरक्षा अधिकारियों के लिए प्रधानमंत्री के सामने से बुलेटप्रूफ ग्लास हटाना एक गंभीर चिंता का विषय था। इसका कारण लाल किले की स्थिति और आसपास का क्षेत्र था। लाल किला दिल्ली के एक व्यस्त इलाके में स्थित है और प्राचीर से सामने का दृश्य स्पष्ट दिखाई देता है। इसके अलावा, आसपास कई ऊंची इमारतें भी हैं। अधिकारियों को लगा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ शीशा आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने अपने निर्णय पर अडिग रहने का फैसला किया।


बुलेटप्रूफ बैरियर का हटना

रात 2 बजे हटाया गया बुलेटप्रूफ बैरियर

आरके माथुर ने बताया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने उसी रात इस व्यवस्था को बदलने का निर्णय लिया। उन्होंने और आईबी प्रमुख ने मिलकर रात करीब दो बजे बुलेटप्रूफ शीशा हटाने का निर्णय लिया। इसके बाद से लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान यह पारदर्शी सुरक्षा बैरियर नहीं दिखाई देता। प्रधानमंत्री का सीधे जनता की ओर देखकर संबोधन स्वतंत्रता दिवस समारोह की तस्वीरों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।


बच्चों से मुलाकात

भाषण के बाद बच्चों से भी मिलते हैं पीएम

लाल किले से संबोधन और ध्वजारोहण के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर छात्रों और एनसीसी कैडेट्स के बीच पहुंचते हैं। इस दौरान बच्चों के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो चर्चा का विषय बनते हैं। इस बार भी बच्चों से मुलाकात के दौरान एक भावुक क्षण देखने को मिला। एक बच्ची ने प्रधानमंत्री के पैर छूने की कोशिश की, और इसी दौरान उसकी टोपी गिर गई। प्रधानमंत्री ने तुरंत उसकी टोपी उठाई और उसे वापस उसके सिर पर रख दिया। इस दृश्य को देखकर आसपास मौजूद बच्चों ने तालियां बजाईं।