क्या है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया कार्यालय? जानें इसकी खासियतें और महत्व
प्रधानमंत्री का नया कार्यालय: एक नई शुरुआत
मकर संक्रांति के अवसर पर, भारत की राजनीति और प्रशासन में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आजादी के 77 वर्षों के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अत्याधुनिक कार्यालय से देश का नेतृत्व करेंगे, जो नए भारत की सोच, सुरक्षा और तकनीक का प्रतीक है। लुटियंस दिल्ली में स्थित यह नया एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव केवल एक सरकारी इमारत नहीं है, बल्कि 2047 के विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नए कार्यालय की विशेषताएँ
प्रधानमंत्री मोदी अब साउथ ब्लॉक के पुराने कार्यालय को छोड़कर इस नए हाई-सिक्योरिटी दफ्तर से कार्यभार संभालेंगे। यह बदलाव केवल स्थान का नहीं है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली को भविष्य के अनुरूप बनाने का प्रयास भी है।
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत निर्मित इस नए पीएमओ को आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है और इसकी लागत लगभग 1,189 करोड़ रुपये है। इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित सरकारी इमारतों में से एक माना जा रहा है।
सुरक्षा और तकनीक का समन्वय
इस नए पीएमओ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था है। प्रधानमंत्री के आवास और कार्यालय के बीच एक भूमिगत सुरंग बनाई गई है, जिससे बिना ट्रैफिक रोके आवाजाही संभव हो सकेगी। कैबिनेट रूम को पूरी तरह साउंडप्रूफ बनाया गया है और इसे इलेक्ट्रॉनिक जासूसी से सुरक्षित रखा गया है, जिससे चर्चाएं पूरी तरह गोपनीय रहेंगी।
साउथ ब्लॉक का स्थानांतरण
साउथ ब्लॉक, जो ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक इमारत है, अब जगह की कमी और आधुनिक तकनीक को अपनाने में कठिनाइयों का सामना कर रहा था। नई सुरक्षा प्रणाली और तेज डेटा ट्रांसफर को पुराने ढांचे में समायोजित करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। सरकार की योजना है कि साउथ ब्लॉक और आसपास की विरासत इमारतों को संरक्षित करते हुए उन्हें राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए।
आम जनता को लाभ
इस परियोजना के तहत प्रधानमंत्री का नया आवास भी पास में बनाया गया है। अब पीएमओ, आवास और सुरक्षा कार्यालय एक ही परिसर में होने से वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक जाम में कमी आएगी। पहले प्रधानमंत्री के काफिले के चलते कई सड़कों को बंद करना पड़ता था, जिससे आम जनता को परेशानी होती थी। नई व्यवस्था से दिल्ली के नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।