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क्या है मसूद अजहर पर पाकिस्तान का नया इनाम? भारत ने किया खुलासा

भारत ने पाकिस्तान की नई चालबाजी को उजागर करते हुए मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये के इनाम को दिखावा करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की ये घोषणाएँ केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने के लिए हैं। जानें इस संदर्भ में भारत का क्या कहना है और मसूद अजहर की आतंकवादी गतिविधियों के बारे में।
 

भारत ने पाकिस्तान की नई चालबाजी का किया पर्दाफाश


नई दिल्ली: आतंकवाद को समर्थन देने के लिए बदनाम पाकिस्तान की हालिया गतिविधियों को भारत ने एक बार फिर उजागर किया है। इस्लामाबाद द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के नेता मसूद अजहर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित करने के कदम को भारत ने दिखावा और ढोंग बताया है। भारतीय सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे खोखले ऐलान से कोई वास्तविक परिणाम नहीं निकलने वाला है और पाकिस्तान को दिखावटी घोषणाओं के बजाय ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।


विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस्लामाबाद का दुनिया को गुमराह करने का यह पुराना तरीका है। भारत ने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश के ऐसे दावों की सच्चाई सभी को पता है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के ये कागजी कदम केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने और अपनी खराब छवि को बचाने के प्रयास हैं।


पाकिस्तान की नई 'रेड बुक' में मसूद अजहर का नाम

रेड बुक में शामिल और इनाम में बढ़ोतरी


पाकिस्तान की एफआईए ने वर्ष 2026 के लिए अपने सबसे वांछित आतंकवादियों की नई 'रेड बुक' जारी की है, जिसमें मसूद अजहर का नाम फिर से भगोड़े के रूप में शामिल किया गया है। इसके साथ ही, उसकी गिरफ्तारी या सजा से जुड़ी जानकारी देने पर मिलने वाले इनाम की राशि को 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है। इस सूची में 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े 19 अन्य आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। जानकारों का मानना है कि यह कदम पाकिस्तान ने वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की आगामी बैठक से पहले खुद को आतंकवाद विरोधी दिखाने के लिए उठाया है।


मसूद अजहर की आतंकवादी गतिविधियाँ

जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर भारत में कई बड़े और घातक आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता रहा है। वर्ष 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले से लेकर 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा आत्मघाती विस्फोट तक, हर भीषण वारदात में उसकी सीधी भूमिका रही है। पहली बार वर्ष 2021 में उसका नाम एफआईए की रेड बुक में दर्ज किया गया था, जिसे 2026 में भी बरकरार रखा गया है। भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि पाकिस्तान को कागजी पैंतरेबाजी बंद कर मसूद अजहर जैसे आतंकियों को कानून के कटघरे में खड़ा करना चाहिए।