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गुजरात पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया

गुजरात पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण अभियान चलाया, जिसमें 638 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और 565 एफआईआर दर्ज की गईं। इस कार्रवाई ने संदिग्ध बैंक खातों की संख्या में भारी कमी लाई है, जिससे बैंकिंग प्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पुलिस ने भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू करने की योजना बनाई है। जानें इस अभियान के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
 

गुजरात पुलिस की बड़ी कार्रवाई


नई दिल्ली: डिजिटल युग में साइबर अपराधियों ने आम लोगों की मेहनत की कमाई को लूटने के लिए जो जाल बिछाया था, उस पर गुजरात पुलिस ने एक महत्वपूर्ण प्रहार किया है। राज्य सरकार के नेतृत्व में और गृह विभाग की देखरेख में, पुलिस ने एक व्यापक अभियान चलाकर अपराधियों के नेटवर्क को तहस-नहस कर दिया है।


फर्जी बैंक खातों का भंडाफोड़

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) को बंद करना था, जिनका उपयोग अपराधी धन छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करते थे। संदिग्ध खातों की पहचान के लिए राज्य के सभी साइबर पुलिस स्टेशनों, स्थानीय अपराध शाखा और इंटेलिजेंस यूनिट को एक साथ लाया गया। पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त खुफिया जानकारी का गहन विश्लेषण कर इस गिरोह की जड़ों को खोज निकाला।


गिरफ्तारियां और एफआईआर

इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने रिकॉर्ड 565 एफआईआर दर्ज की और देश के विभिन्न हिस्सों से 638 अपराधियों को गिरफ्तार किया। जांच में कुल 193 सक्रिय म्यूल अकाउंट्स को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया गया है। इस बड़े ऑपरेशन के दौरान लगभग 4052 साइबर अपराध के मामलों की कड़ियां आपस में जुड़ी पाई गईं, जिनमें से 491 मामलों का सीधा संबंध गुजरात राज्य से था।


बैंकिंग प्रणाली पर प्रभाव

पुलिस की इस सख्त कार्रवाई का बैंकिंग प्रणाली पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, संदिग्ध खातों से चेक के माध्यम से नकदी निकासी में 75 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। इसके अलावा, 2025 के अंत में एटीएम से अवैध नकद निकासी में भी लगभग 66 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जिससे अपराधियों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है।


भविष्य की सुरक्षा तकनीक

भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए रिजर्व बैंक के मार्गदर्शन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत हर डिजिटल लेन-देन की रिस्क स्कोरिंग की जाएगी ताकि संदिग्ध लेन-देन को तुरंत रोका जा सके। साथ ही, 'Mulehunter.ai' नामक एक आधुनिक डिजिटल रजिस्ट्री भी बनाई गई है, जो सभी बैंकों को रियल-टाइम डेटा साझा करने और अपराधियों को पकड़ने में मदद करेगी।