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गोरखपुर में घाट पर हादसा: दो अधिवक्ताओं की मौत, एंबुलेंस में देरी पर हंगामा

गोरखपुर में गोरक्षनाथ घाट पर एक दुखद हादसे में दो अधिवक्ताओं की जान चली गई। गुंबदनुमा छज्जे का स्लैब गिरने से यह घटना हुई। एंबुलेंस की देरी के कारण वकीलों ने हंगामा किया। आलोक अस्थाना और संजय सिंह की मौत के बाद अस्पताल में लापरवाही के आरोप भी लगे हैं। इस घटना ने घाट की निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं।
 

गोरखपुर में दुखद घटना


गोरखपुर: रविवार को गोरक्षनाथ घाट पर एक गंभीर हादसा हुआ। अंतिम संस्कार में शामिल होने आए दो वकील गुंबदनुमा छज्जे के नीचे बैठे थे, तभी अचानक छज्जे का स्लैब गिर गया। इस घटना में आलोक अस्थाना (45) और संजय सिंह की जान चली गई। घटना के बाद बड़ी संख्या में वकील जिला अस्पताल पहुंचे और एंबुलेंस की देरी पर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने एक एंबुलेंस को भी नुकसान पहुंचाया। करीब चार घंटे तक चले इस हंगामे के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद रही।


घायलों को ई-रिक्शा से अस्पताल पहुंचाया गया

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा सुबह लगभग 11:30 बजे हुआ। स्थानीय लोगों ने मलबा हटाकर दोनों अधिवक्ताओं को बाहर निकाला। एंबुलेंस को सूचित करने के बावजूद, वह लगभग 30 मिनट तक नहीं आई। इसके बाद दोनों को ई-रिक्शा से जिला अस्पताल ले जाया गया। आलोक की स्थिति गंभीर थी और उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। संजय सिंह ने भी देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।


अस्पताल में लापरवाही का आरोप

आलोक की पत्नी शालिनी अस्थाना ने अस्पताल में उचित इलाज न मिलने का आरोप लगाते हुए सीएमओ राजेश झा और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इस शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। शालिनी ने सीएमओ पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगाया है। वहीं, डीएम दीपक मीणा ने एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम की जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि आकाशीय बिजली गिरने से स्लैब गिरने की आशंका है।


घाट की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

गोरक्षनाथ घाट का निर्माण सिंचाई विभाग द्वारा किया गया था और इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 फरवरी 2021 को किया था। घाट के सौंदर्यीकरण पर लगभग 27.85 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस निर्माण को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। नगर निगम ने इसे औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं किया है, हालांकि यहां सफाई का कार्य किया जाता है। हादसे के बाद तत्कालीन जेई और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।


आलोक अस्थाना ने लगभग 20 वर्षों से दीवानी कचहरी में वकालत की थी, जबकि संजय सिंह को वकालत करते हुए 28 वर्ष हो चुके थे। दोनों परिवारों को चार-चार लाख रुपये की तत्काल सहायता दी गई है और शासन को पांच-पांच लाख रुपये की अतिरिक्त मदद के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। घाट पर बने चबूतरों का उपयोग अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने के लिए किया जाता है। इस घटना ने अन्य निर्माणों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।