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चंद्रशेखर आजाद का संसद में धरना: शिक्षा सुधार की मांग

चंद्रशेखर आजाद, सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख, ने संसद परिसर में धरना देकर शिक्षा सुधार की मांग की है। उन्होंने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाई और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। आजाद का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से सुना जाना चाहिए। उनके धरने को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिससे शिक्षा सुधार और छात्र आंदोलनों पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
 

संसद परिसर में धरना


बारिश और तेज हवाओं के बावजूद, आजाद समाज पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद संसद परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठे हैं। उनके पीछे शिक्षा सुधार, कथित पेपर लीक और जवाबदेही की मांग के पोस्टर लगे हुए हैं। उनके धरने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं।


छात्रों पर कार्रवाई के बाद धरने का निर्णय

चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि उन्होंने यह कदम जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने के बाद उठाया। उनका कहना है कि छात्र लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने समय पर संवाद नहीं किया। यदि पहले बातचीत होती, तो टकराव से बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को संसद तक पहुंचाने के लिए उन्होंने संसद परिसर में विरोध दर्ज कराया।


सरकार पर गंभीर आरोप

धरने के दौरान, सांसद ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि कई छात्रों, विशेषकर छात्राओं, को चोटें आईं और प्रदर्शन को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई की गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आजाद का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से सुना जाना चाहिए।


शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की, लेकिन साथ ही कहा कि केवल इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां संस्थागत सुधार की मांग करती हैं और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।


'छात्र बाहर लड़ रहे हैं, मैं संसद के भीतर'

सांसद ने कहा कि सुरक्षा कारणों से छात्र संसद परिसर में नहीं आ सकते, इसलिए उन्होंने उनके प्रतिनिधि के रूप में भीतर से संघर्ष करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों की लड़ाई संसद के बाहर चल रही है, तो वह संसद के भीतर उनकी आवाज बनेंगे। उनका यह भी कहना था कि वह इस संघर्ष को अकेले भी जारी रखने के लिए तैयार हैं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेंगे।


सोशल मीडिया पर समर्थन

धरने के दौरान, चंद्रशेखर आजाद लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो और संदेश साझा कर रहे हैं। उन्होंने अपने संदेशों में कहा कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष किसी भी मौसम से बड़ा होता है। उनके धरने को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने भी समर्थन दिया है और छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। इस बीच, संसद परिसर में बारिश के बीच बैठे सांसद की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई हैं, जिससे शिक्षा सुधार और छात्र आंदोलनों पर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।