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चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भारत की चिंता: अरुणाचल प्रदेश और शक्सगाम घाटी का मामला

भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर अरुणाचल प्रदेश और शक्सगाम घाटी में चीन की गतिविधियों को लेकर। भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को मान्यता नहीं देने का स्पष्ट संदेश दिया है। इस लेख में जानें कि कैसे चीन ने अपनी रणनीतियों को आगे बढ़ाया है और भारत की प्रतिक्रिया क्या है।
 

चीन की रणनीति पर भारत की नजरें

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक पुरानी कहावत है कि जहां आपका ध्यान होता है, वहां कुछ नहीं होता, और असली खेल उस जगह होता है, जहां आपकी नजरें नहीं जातीं। भारत के रक्षा विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक इस समय ईरान, वेनेजुएला, अमेरिका, ट्रंप, और यूक्रेन-रूस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन इस बीच, चीन ने अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। हाल ही में, चीन ने अरुणाचल प्रदेश पर दबाव बढ़ाना शुरू किया है। उन्होंने कुछ भारतीय नागरिकों को पकड़कर यह कहा कि उनका भारतीय पासपोर्ट वहां मान्य नहीं है, क्योंकि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है।


शक्सगाम घाटी में चीन की गतिविधियाँ

अरुणाचल प्रदेश पर भारत का दावा मजबूत है। इसी बीच, चीन ने एक और कदम उठाया है। जब आप लेह-लद्दाख की ओर बढ़ते हैं, तो अक्साई चीन के क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर के बीच शक्सगाम घाटी है। हाल ही में सेटेलाइट तस्वीरों में यह स्पष्ट हुआ है कि चीन वहां सड़क निर्माण कर रहा है।


भारत का आधिकारिक रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को मान्यता नहीं देता, क्योंकि यह भारतीय क्षेत्र से गुजरता है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। इस पर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि यह क्षेत्र चीन का हिस्सा है और चीन की बुनियादी ढांचा गतिविधियाँ उचित हैं।


सीपीईसी पर चीन का दृष्टिकोण

माओ ने कहा कि सीपीईसी एक आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय विकास और लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कश्मीर मुद्दे पर चीन का रुख अपरिवर्तित है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार सुलझाया जाना चाहिए।


भारत का स्पष्ट संदेश

जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं, और यह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को कई बार स्पष्ट की जा चुकी है।