चीन की भूमिका से अमेरिका-ईरान संघर्षविराम की संभावना बढ़ी
चीन की कूटनीतिक भूमिका
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम में चीन की महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका पर चर्चा हो रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीजिंग ने तेहरान को वार्ता के लिए राजी करने में मदद की, हालांकि चीन ने अपनी भूमिका को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि चीन ने वार्ता की प्रक्रिया में योगदान दिया।
सीजफायर में चीन का योगदान
चीन की भूमिका सीजफायर में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिका के साथ सुपर पावर के रूप में, चीन ने हाल ही में बहरीन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर वीटो किया। ईरान ने यह घोषणा की थी कि वह कर और टोल चाइनीज करेंसी में लेगा, जिससे डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने की कोशिश की गई। लगभग 12 से 13 दिन पहले, चीन और पाकिस्तान ने एक ड्राफ्ट तैयार किया था जिसमें स्टेट ऑफ हार्मोस को खोलने की सहमति दी गई थी।
ट्रंप की घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम पर सहमति जताई है। ट्रंप ने कहा कि यह दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी इस संघर्षविराम को स्वीकार किया है।
बातचीत की संभावनाएं
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने कहा कि बातचीत जारी है, लेकिन आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा की जा रही है। ट्रंप ने बताया कि अमेरिका को ईरान से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला है, जिसे बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संघर्षविराम एक बड़े समझौते की दिशा में एक कदम है।
ईरान की मांगें
ईरान ने संघर्षविराम के बदले में अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाने और उसकी परिसंपत्तियों पर लगी रोक को समाप्त करने की मांग की है। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर हमले रोके जाते हैं, तो उनकी सेनाएं भी अपने रक्षात्मक अभियान को रोक देंगी।