चीन की मीडिया और प्रभावशाली लोग भारतीयों के विरोध से परेशान
चीन की प्रतिक्रिया
चीन की सरकारी मीडिया और उसके प्रभावशाली लोग भारतीयों के बढ़ते विरोध से चिंतित हैं। हाल के दिनों में, ताइवान के नागरिक भी चीन के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भारतीयों ने चीन की गरीबी, गंदगी, झुग्गियों, सामाजिक असमानता और जाति व्यवस्था का पर्दाफाश किया है। उन्होंने यह दिखाया है कि चीन भी चार जातियों में विभाजित है: शी, नोंग, गोंग और शोंग। शी वर्ग में विद्वान और प्रशासक आते हैं, नोंग किसान हैं, गोंग कारीगर हैं, और शोंग व्यापारियों का समूह है।
हुकऊ सिस्टम का भेदभाव
चीन में हुकऊ सिस्टम के माध्यम से भेदभाव किया जाता है, जो नागरिकों के निवास क्षेत्र और सरकारी सुविधाओं का निर्धारण करता है। यह प्रणाली ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच एक बड़ा अंतर पैदा करती है। करोड़ों ग्रामीण श्रमिक शहरों में काम करने आते हैं, लेकिन उन्हें स्थायी निवासियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। इस स्थिति को सुनकर चीन का सरकारी मीडिया इसे झूठा बताने लगा है।
ताइवान का समर्थन
ताइवान के लोग भी अब चीन की असमानता और गरीबी के खिलाफ सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर रहे हैं। चीन ने भारत के खिलाफ प्रोपगैंडा पर अरबों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन भारतीयों ने 1 जीबी मोबाइल डेटा से इस प्रोपगैंडा को ध्वस्त कर दिया है। चीन ने भारत और पाकिस्तान के कुछ प्रभावशाली लोगों को पैसे देकर अपनी छवि को बचाने की कोशिश की है।
सोशल मीडिया पर प्रभाव
चीन की छवि को बचाने के लिए कई भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स अचानक चीन के बारे में सकारात्मक वीडियो बनाने लगे हैं। कुछ पत्रकार चीन के हुकऊ सिस्टम का फैक्ट चेक कर रहे हैं, यह बताते हुए कि चीन में असमानता नहीं है। यह देखना दिलचस्प है कि चीन के प्रभाव में काम कर रहे ये इन्फ्लुएंसर्स कभी भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए नहीं बोले।
भारतीय संस्कृति की ताकत
चीन ने दशकों से पैसे के बल पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत में बैठे इन्फ्लुएंसर्स से भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म का मजाक बनवाया है। लेकिन भारतीयों की ताकत को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के गुरु ने पहचाना है, जिन्होंने कहा था कि भारतीय संस्कृति भौतिकता से परे है।