चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों का किया विरोध, बौद्धिक संपदा चोरी के आरोपों पर प्रतिक्रिया
चीन का कड़ा विरोध
चीन ने अमेरिका द्वारा बौद्धिक संपदा चोरी के आरोप में गूगल के पूर्व इंजीनियर से संबंधित पांच चीनी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों का तीव्र विरोध किया है। मंगलवार को वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का यह कदम चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। मंत्रालय ने इसे 'निंदनीय' करार देते हुए कहा, 'चीन इसका कड़ा विरोध करता है।'
मंत्रालय ने अमेरिका से आग्रह किया कि वह अपने 'गलत कदम को सुधारें' और चेतावनी दी कि चीन 'आवश्यक कदम' उठाने के लिए तैयार है, हालांकि इन कदमों का विवरण नहीं दिया गया। यह प्रतिक्रिया अमेरिका के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रतिबंध लगाने के एक दिन बाद आई है।
लिनवेई डिंग और कंपनियों का संबंध
ये कंपनियां लिनवेई डिंग से जुड़ी हैं, जिन्होंने शंघाई झिसुआन टेक्नोलॉजी की स्थापना की थी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, डिंग ने गूगल में अपने अनुभव का हवाला देते हुए दावा किया था कि उनकी कंपनी अमेरिकी प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी की 'सुपर इंटेलिजेंस' जैसी तकनीक विकसित कर सकती है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि नए उद्यमों को प्रारंभिक सहायता देने वाले कार्यक्रम 'मिरेकलप्लस' ने झिसुआन में हिस्सेदारी के बदले उसे प्रारंभिक पूंजी प्रदान की थी। झिसुआन और मिरेकलप्लस पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
व्यापारिक रहस्यों की चोरी का आरोप
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि झिसुआन ने 'अमेरिकी नागरिकों और संस्थाओं के व्यापारिक रहस्यों की बड़े पैमाने पर जानबूझकर चोरी की है या उससे लाभ उठाया है।' यह चोरी पांच जनवरी 2023 या उसके बाद हुई थी।
डिंग पर 2024 में गूगल से कृत्रिम मेधा (एआई) संबंधी व्यापारिक रहस्यों की चोरी का आरोप लगाया गया था। आरोप है कि उस समय वह गुप्त रूप से चीन स्थित दो कंपनियों के लिए भी काम कर रहे थे। इस साल जनवरी में सैन फ्रांसिस्को की एक संघीय जूरी ने डिंग को आर्थिक जासूसी और व्यापारिक रहस्यों की चोरी के कई मामलों में दोषी ठहराया।
न्यायिक प्रक्रिया और चीन की प्रतिक्रिया
हालांकि, बाद में एक न्यायाधीश ने आर्थिक जासूसी के आरोपों को खारिज कर दिया और डिंग को 12 महीने की जेल की सजा सुनाई। अमेरिकी न्याय विभाग ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में देश का विकास 'बुनियादी अनुसंधान पर लंबे समय से दिए जा रहे ध्यान, नवोन्मेष में लगातार निवेश, स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार तथा खुले सहयोग की नीति पर कायम रहने का परिणाम है।'
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन की उपलब्धियों का 'व्यापारिक रहस्यों की तथाकथित चोरी से कोई लेना-देना नहीं है।'